मॉय थाई

सिटीचाई की मार्शल आर्ट्स दुनिया के शिखर पर पहुंचने की शानदार यात्रा

कई महीनों तक कयास लगने के बाद “द किलर किड” सिटीचाई सिटसोंगपीनोंग आखिरकार अपना प्रोमोशनल डेब्यू शुक्रवार, 31 जुलाई को करेंगे।

शुक्रवार रात को थाई सनसनी अपने पुराने विरोधी व हमवतन सुपरबोन का सामना थाइलैंड के बैंकॉक में होने वाले ONE: NO SURRENDER की फेदरवेट किकबॉक्सिंग सुपर-बाउट में करेंगे।

दोनों वर्ल्ड क्लास स्ट्राइकर्स के बीच ये तीसरा मुकाबला होगा। जीतने वाला खुद को ONE Championship एथलीट रैंकिंग्स में ऊपर उठाकर टॉप स्पॉट में शामिल कर लेगा।

लेकिन इससे पहले कि सिटीचाई सर्कल की ओर पहला कदम बढ़ाएं, आइए इस मौके पर 11 बार के किकबॉक्सिंग व मॉय थाई वर्ल्ड चैंपियन के बारे में थोड़ा बहुत जान लेते हैं।

मॉय थाई के बीच गुजरा बचपन

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Good morning เช้านี้10โลพอเบาๆ@venum

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सिटीचाई का पालन पोषण उनके माता-पिता ने बुरीराम प्रांत में किया, जो किसानी और मजदूरी किया करते थे। उनका परिवार काफी गरीब था लेकिन इस युवा के माता-पिता कुछ न कुछ तरीका निकालकर परिवार का पेट पाल लिया करते थे।

जब “द किलर किड” नौ साल के थे, तो उन्होंने अपने पिता जो कि समारन मुआंगरोंग नाम से एक पुराने थाई बॉक्सर के तौर पर जाने जाते थे, उनसे मॉय थाई सीखना शुरू कर दिया।

हालांकि, पिता अपने बेटे को वो तकनीक नहीं सिखा पा रहे थे, जिससे वो मुकाबला कर सकें। उन्होंने सख्ती से इसे सेल्फ डिफेंस के उद्देश्य से सिखाया था।

सिटीचाई को याद है, “मैं बचपन में काफी छोटा और कमजोर लड़का हुआ करता था, जो किसी से फाइट नहीं कर सकता था। इस वजह से पिता ने मुझे मॉय थाई सिखाई, ताकि मैं दबंगों से अपनी रक्षा कर सकूं।”

फिर ये बात सामने आई कि युवा एथलीट को इस विधा में मजा आने लगा और दो साल की ट्रेनिंग के बाद उन्हें लगा कि अब वो अपनी स्किल्स को परखने के लिए तैयार हैं।

उन्होंने बताया, “पिता ने मुझसे पूछा कि क्या मैं दूसरों से मुकाबला कर सकता हूं।”

“उस समय मेरे गांव में ट्रायल चल रहे थे, तो उन्होंने मुझसे पूछा कि क्या तुम ट्राई करना चाहोगे। मैंने “हां” कहा तो मेरे पिता मुझे वहां ले गए।

“मैं जब ट्रायल में पहुंचा तो मुझे ऐसे लड़के से मुकाबला करना था, जिसके पास 10 बाउट का अनुभव था, जबकि वो मेरी पहली बाउट थी।”

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เตรียมพร้อมไว้????????

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अपने से ज्यादा अनुभवी विरोधी के खिलाफ सिटीचाई को उनके पेट पर लगे घुटने ने रोक दिया।

हालांकि, हार के बावजूद उन्होंने 150 बाह्त (करीब 5 यूएस डॉलर) जीते और “द आर्ट ऑफ 8 लिंब्स” से पैसा कमाने की क्षमता से वो दंग रह गए।

उन्होंने कहा, “पैसा कमाने का वो सबसे तेज तरीका था।”

“मैं सिर्फ 11 साल का था और मैंने कभी इतना पैसा नहीं कमाया था। मुझे लगा कि ये चीजें करके मैं खूब पैसा कमा सकता हूं। मुझे लगा कि अगर मैं अपने करियर में ये करता रहा तो और भी पैसा कमा सकता हूं और अपने माता-पिता का खयाल रख सकता हूं। और तो और मैं खुद को सपोर्ट करने के लिए भी कमा सकता हूं।”

इस बात से प्रोत्साहित सिटीचाई घर लौटे और अपनी स्किल्स को धार देते रहे।

इसके बस एक महीने बाद वो फिर से एक ट्रायल में मुकाबला करने गए और जीत गए। इसके तुरंत बाद उनके पिता उन्हें सिट क्रू यिआम कैंप लेकर गए, जहां उन्होंने अपनी तकनीकों को और निखारा।

“द किलर किड” इन तकनीकों को अपने साथ रिंग तक ले गए। इसके साथ वो जीतते रहे और अधिक पैसा कमाते रहे।

उन्होंने कहा, “इस तरीके से पैसा तेजी से और ज्यादा आ रहा था। मैं तेजी से कमाई करके खुश था और पैसा बढ़ता ही जा रहा था।”

उन्होंने अपनी तेजी से हो रही कमाई का इस्तेमाल चतुराई से किया।

सिटीचाई ने कहा, “मॉय थाई से आने वाले पैसे से मैं खुद को स्कूल भेज पाया। साथ ही मैंने अपने माता-पिता पर पड़ने वाले बोझ को भी कम किया। इससे मुझे काफी गर्व महसूस हुआ कि मैं ऐसा कर पाया। दूसरे बच्चे जब आसपास खेला-कूदा करते थे तो मैं पैसा कमाकर अपने परिवार की मदद करता था।”

बैंकॉक और विदेश का सफर

सिटीचाई जब तक 15 साल के हुए वो बैंकॉक के विश्व प्रसिद्ध Lumpinee Stadium में मुकाबला करने लगे। इसके साथ बुरीराम प्रांत में बाउट्स व ट्रेनिंग करना उन्होंने जारी रखा।

हालांकि, दो साल बाद वो एक बड़ा बदलाव करने के लिए तैयार थे।

उन्होंने कहा, “जब मैं 17 साल का हुआ तो मैंने खुद को सुधारने के बारे में विचार किया क्योंकि मैं प्रांत में ही ट्रेनिंग ले रहा था, जो बहुत असरदार नहीं थी।”

“मुझे लगा कि मैं बैंकॉक में दूसरे विरोधियों से मुकाबला करने के लिए ताकतवर नहीं था। मैंने बैंकॉक जाकर एक जिम तलाशा और खुद को बेहतर बनाने के बारे में सोचा।”

और उनकी किस्मत में भी कुछ ऐसा ही होना तय था। उधर, Sitsongpeenong Gym के मालिक टिम धर्माजीवा थाई में जन्मे बड़े शरीर वाली प्रतिभा की तलाश कर रहे थे।

वो “द किलर किड” से मिले और उन्होंने उन्हें अपने खेमे में शामिल कर लिया।

सिटीचाई को याद है, “किस्मत से Sitsongpeenong Gym के बॉस टिम बिग बिल्ड ऐसा बॉक्सर चाहते थे, जिसे वो विदेशों में भी फाइट के लिए प्रमोट कर सकें।”

“मैं उस समय राज्य में ही था और मेरे पास कोई विरोधी भी नहीं था। इस वजह से मैं बॉस टिम से मिलने गया और वो मुझे Sitsongpeenong Gym में ट्रेनिंग कराने के लिए ले आए।”

सिटीचाई को अंत में वो बेहतरीन ट्रेनिंग करने को मिली, जो वो हमेशा से चाहते थे। वो जब 18 साल के हो गए थे तो धर्माजीवा उन्हें फ्रांस में पेरिस ले गए। वहां “Nuit des Titans” 4-मैन मॉय थाई टूर्नामेंट में मुकाबला करवाया।

सेमीफाइनल राउंड में उनका मुकाबला फैबियो पिंचा से हुआ, जो फ्रांस के प्रमुख मॉय थाई एथलीट माने जाते थे। सिटीचाई ने यूरोपियन स्ट्राइकर को सर्वसम्मत निर्णय के जरिए हरा दिया था और फाइनल में प्रवेश कर गए। वहां उनका मुकाबला वेटरन व कई बार के मॉय थाई वर्ल्ड चैंपियन अनुवाट काएवसामृत से हुआ।

चीजें “द किलर किड” के पक्ष में नहीं दिख रही थीं लेकिन परेशानियों से पार पाते हुए उन्होंने सर्वसम्मत निर्णय के जरिए जीत हासिल कर ली और टूर्नामेंट के ताज पर कब्जा जमा लिया।

सिटीचाई ने कहा, “इस तरह की जीत ने मेरी विदेशों में मुकाबला जारी रखने की चाहत को बनाए रखा। इससे अच्छे पैसे मिलने के साथ वहां पर ज्यादा लोग मुझे जानने लगे।”

आने वाले कई साल तक थाई एथलीट ने इंटरनेशनल स्तर पर मुकाबला करना जारी रखा लेकिन उन्होंने कई सारी बेल्ट थाइलैंड में भी जीतीं। इसमें 2014 का Lumpinee Stadium वर्ल्ड टाइटल भी शामिल रहा।



फिर किकबॉक्सिंग को चुना

मॉय थाई में आठ टाइटल जीतने के बाद थाइलैंड में सबसे बड़े प्रोमोशन और विदेश में मुकाबला करने के बाद सिटीचाई बदलाव चाहते थे। बुरीराम के मूल निवासी को लगा कि अब वो स्थिर हो गए हैं इसलिए उन्होंने नई विधा में खुद को चुनौती देने का फैसला किया।

उन्होंने बताया, “मैंने पूरी जिंदगी मॉय थाई की ट्रेनिंग की थी इसलिए मैं कुछ और बड़ा करना चाहता था क्योंकि मैं मॉय थाई के शिखर पर पहुंच चुका था।”

“मैं किकबॉक्सिंग भी ट्राई करना चाहता था। मैं खुद को इस खेल में साबित करना चाहता था। साथ ही ये भी देखना चाहता था कि और कितना ऊंचा जा सकता हूं। मैं अपना विकास करना चाहता था। किकबॉक्सिंग को दुनिया भर में जाना जाता है और इसमें ज्याादा पैसे भी मिलते हैं। इन्हीं चीजों के चलते मैं दुनिया का सबसे अच्छा किकबॉक्सर बनना चाहता था।”

किकबॉक्सिंग में छलांग लगाने के कुछ समय बाद, जो एथलीट एक बार स्पोर्ट्स राइटर एसोसिएशन ऑफ थाइलैंड द्वारा 2015 में इंटरनेशनल मॉय थाई एंबेसडर के लिए नामांकित किया गया था, उसे नए खेल की बदली हुई स्टाइल से प्यार होने लगा था।

सिटीचाई ने कहा, “किकबॉक्सिंग में मुझे जो पसंद आया, वो था कैसे अपने दांव को लगाया जाए।”

“किकबॉक्सिंग में हम अपने दांव को लगातार लगाना जारी रख सकते हैं। इसका स्टाइल मॉय थाई से काफी अलग है। हम तब तक पंच लगाना जारी रख सकते हैं, जब तक विरोधी धराशाई न हो जाए और मैं उतना ही बेहतर होना चाहता था।”

फिर सिटीचाई सफल हुए। “द किलर किड” ने पांच अलग-अलग प्रोमोशंस से 11 किकबॉक्सिंग टाइटल हासिल किए। उनकी सबसे बड़ी जीत में एंडी “सावर पावर” सावर, जॉर्जियन सुपरस्टार डेविट कीरिया और उनके आने वाले विरोधी सुपरबोन पर जीत शामिल रहीं।

हालांकि, महानता का रास्ता हमेशा शानदार नहीं होता है।

सिटीचाई ने कहा, “मुझे काफी गर्व है क्योंकि इस मुकाम तक पहुंचने में मुझे काफी ज्यादा समय लगा। इसमें काफी सारा समय, अनुभव, काफी सारी ताकत, दिमाग और कई सारी चीजें लगीं। दुनिया में सबसे बेहतरीन बनने का सफर काफी थका देने वाला रहा।”

“चोटी पर बने रहना आसान नहीं होता है लेकिन मैं अपनी पूरी कोशिश कर रहा हूं। चोटी पर बने रहने के लिए मैं अपना सबसे बेस्ट करने की कोशिश कर रहा हूं। ये प्रयास उस दिन तक जारी रहेगा, जब तक मैं रिटायर नहीं हो जाता हूं।”

ONE का रास्ता

मई में सिटीचाई ने अपने पेशेवर किकबॉक्सिंग और मॉय थाई करियर का सबसे बड़ा कदम तब उठाया, जब उन्होंने ONE Championship के साथ साइन किया।

28 साल के एथलीट ने दुनिया भर में मुकाबला किया है लेकिन वो सर्कल में कदम रखकर अपनी स्किल्स को दुनिया के सबसे बेहतरीन स्ट्राइकर्स के सामने परखना चाहते हैं।

कई बार के चैंपियन ने कहा, “मैंने ONE Championship इसलिए जॉइन की क्योंकि यहां काफी सारे बेहतरीन फाइटर्स हैं।”

“यहां पर इतने सारे अच्छे एथलीट हैं, जितने कहीं पर नहीं हैं। मैं अपने आपको इस वर्ल्ड क्लास स्टेज पर साबित करना चाहता हूं। मैं यहां वर्ल्ड चैंपियनशिप टाइटल जीतना चाहता हूं।”

वर्ल्ड टाइटल के लक्ष्य के साथ ही सिटीचाई कई एथलीट्स से मुकाबला करने के इच्छुक हैं। उनसे पहले मुकाबले का मौका उन्हें नहीं मिला। इसमें “द बॉक्सिंग कंप्यूटर” योडसंकलाई IWE फेयरटेक्स और ONE फेदरवेट किकबॉक्सिंग वर्ल्ड ग्रां प्री चैंपियन जियोर्जियो “द डॉक्टर” पेट्रोसियन शामिल हैं।

सिटीचाई ने इन दोनों एथलीट्स को अपने किकबॉक्सिंग और मॉय थाई करियर के दौरान देखा है। इन दोनों जीते-जागते लैजेंड को हराने से ज्यादा सुकून उन्हें किसी और चीज में नहीं मिल सकता।

इन सबके ऊपर वो दुनिया भर में सबसे महान एथलीट के तौर पर मशहूर होना चाहते हैं।

उन्होंने कहा, “मैं ऐसा करना तब तक जारी रखना चाहता हूं, जब तक मैं पूरी थाइलैंड और दुनिया में मशहूर नहीं हो जाता हूं।”

“मैं चाहता हूं कि लोग मुझे दुनिया के सबसे बेहतरीन किकबॉक्सर के तौर पर याद रखें। मैं चाहता हूं कि सिटीचाई सिटसोंगपीनोंग को सभी मुकाबलों के चैंपियन के तौर पर याद रखा जाए, ताकि वो ये कह सके कि मैं जहां गया, वहां चैंपियनशिप का टाइटल जीता।”

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