मॉय थाई

पेटमोराकोट की दरियादिली उन्हें एक सच्चा मार्शल आर्टिस्ट बनाती है

पेटमोराकोट पेटयिंडी एकेडमी कहते हैं कि अगर उनके अंदर दूसरों के लिए दया नहीं होती तो वो मॉय थाई वर्ल्ड चैंपियन नहीं बन सकते थे।

अब जब थाई हीरो अपने प्रोफेशन में शीर्ष पर पहुंच गए हैं तो वो दूसरों की मदद करने के लिए दृढ़ संकल्पित हैं, ताकि बाकी लोगों को भी वैसे ही जीने का मौका मिले, जैसे उन्हें मिला था।

थाइलैंड के 26 वर्षीय एथलीट, इस शुक्रवार, 7 फरवरी को ONE: WARRIOR’S CODE में पहली ONE फेदरवेट मॉय थाई वर्ल्ड चैंपियनशिप के लिए बाउट करेंगे। ये नहीं भूलते कि एक कठिन बचपन होने के बावजूद उनकी परवरिश एक अंतरराष्ट्रीय स्टार बनने की हुई। ये उन्हें उस तरह की करुणा दिखाने के लिए प्रेरित करता है, जिसने उन्हें शीर्ष पर ले जाने में मदद की।

Petchmorakot Petchyindee Academy celebrates his win against Charlie Peters

वो कहते हैं, “ये वास्तव में व्यक्ति पर निर्भर करता है लेकिन मेरे लिए ये महत्वपूर्ण है क्योंकि मैं बहुत गरीबी से आया हूं।”

“मैं आज जहां पहुंचा हूं, मुझको वहां लाने में मेरी कई लोगों ने मदद की इसलिए मुझे लगता है कि वो चीजें वापस करनी जरूरी हैं। ये मुझे खुशी देती हैं। साथ ही प्रोत्साहित करती रहती हैं कि मैं दूसरों की मदद कर सकता हूं।”

पेटमोराकोट जब छोटे थे, तो उनका परिवार बहुत गरीब था। उन्हें कभी-कभी भोजन के लिए भटकने तक को मजबूर होना पड़ता था। एक एथलीट के रूप में सफलता का स्वाद चखने के बाद उन्होंने तय किया कि अब उन्हें कभी इस तरह का संघर्ष नहीं करना पड़ेगा।

इस एथलीट को खेत से ग्लोबल स्टेज तक की यात्रा कराने के लिए उनका सही मार्गदर्शन करने का श्रेय Nuttadaj Vachirarattanawong को जाता है, जो थाइलैंड में सिया “बोट” के रूप में जाने जाते हैं। पेटमोराकोट के मैनेजर के रूप में उन्होंने अपने कर्तव्यों से परे जाकर बहुत कुछ किया है।

पेटयिंडी एकेडमी का संचालन करने वाला ये इंसान कई मार्शल आर्टिस्टों के लिए एक पिता समान हैं। इसमें ONE Super Series के बड़े सितारे भी शामिल हैं, जो “द बेबी शार्क” पेचडम पेटयिंडी एकेडमी और “द बेबी फेस किलर” सवास माइकल पेटयिंडी एकेडमी जैसे मशहूर एथलीट हैं। इन एथलीटों को सलाह देकर उन्होंने इनकी जिंदगी बना दी।



पेटमोराकोट कहते हैं, “सिया बोट ने मुझे बहुत कुछ सिखाया है।”

“वो सिखाते हैं कि हमारे ऊपर जो दया दिखाई गई है, उसे हमें चुकाना चाहिए। हमें लोगों की मदद करनी चाहिए और उन्हें बताना चाहिए कि असलियत में वो क्या हैं। वो हमारे बुजुर्ग हों या फिर समुदाय के प्रभावशाली लोग, हमें सबके प्रति सम्मान दिखाना चाहिए। अगर हम इस मूलमंत्र को याद नहीं रखते हैं तो एक इंसान के रूप में प्रगति नहीं कर सकते हैं।”

“वो हमेशा हमें ये बातें याद दिलाने के लिए वहां हैं। वो हमें एक परिवार की तरह प्यार करते हैं और अच्छा इंसान बनने के लिए प्रेरित करते हैं।”

गुरु से मिले सबक ने पेटमोराकोट को अपनी सफलता अन्य थाई लोगों के साथ साझा करने के लिए प्रेरित किया है, जो उनकी तरह भाग्यशाली नहीं हैं।

वो अपनी सफलता के लिए सबका धन्यवाद करते हैं। फिर चाहे वो पहले स्टेडियम सर्कल पर हो या फिर दुनिया के सबसे बड़े मार्शल आर्ट्स संगठन के लिए। वो आज उस स्थिति में हैं, जब वो परिवार के अलावा बाहरी लोगों की जिंदगी में बदलाव ला सकते हैं।

उन्होंने बताया, “मैं लोपबुरी में एक अनाथालय की मदद करता हूं। मैं उन्हें पैसे भेजता रहता हूं। मैं करीब दो साल से ऐसा कर रहा हूं। उन्हें जब किसी चीज की जरूरत होती है, तो वो उनके पास पहुंच जाती हैं।”

“मैं कई वजहों से दूसरों की मदद और दान करता हूं। मेरे सामने जब चीजें आती हैं तो मैं जितनी हो सके उतनी मदद करने की कोशिश करता हूं। पिछले साल मैंने उबन में बाढ़ आने के बाद मदद के लिए अपने शॉर्ट्स को नीलाम कर दिया था। दरअसल, ये मेरा घर था और मुझे अपने घर की मदद करनी थी।”

Petchmorakot Petchyindee Academy defeats Charlie Peters at ONE EDGE OF GREATNESS

पेटमोराकोट की दया करने वाली आदत ONE Championship के मूल्यों के साथ जुड़कर ये दिखाती है कि जितना एक एथलीट को रिंग में बेहतर करने के लिए उसकी क्षमता को उभारा जाता है, उतना ही एथलीट के चरित्र पर भी जोर दिया जाता है।

पेटमोराकोट लोगों की भलाई का काम करने पर गर्व महसूस करते हैं। वो थाई एथलीटों के लिए प्रेरणास्त्रोत बनना चाहते हैं।

जिस तरह से वो चीजों को देखते हैं, उनका दृष्टिकोण उच्च स्तर पर सफलता पाने के लिए महत्वपूर्ण नज़र आता है।

वो कहते हैं, “अगर एक एथलीट को दया नहीं आती है या वे इसे अपनाने के लिए तैयार नहीं है तो वो एक व्यक्ति के रूप में करियर में प्रगति नहीं कर सकता है।”

“अगर लोग आपको पसंद नहीं करते तो वे आपकी मदद नहीं करेंगे।”

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जकार्ता | 7 फरवरी | ONE: WARRIOR’S CODE | टिकेट्सयहां क्लिक करें  

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