ज़ेबा बानो ने सामाजिक बंदिशों को तोड़कर मार्शल आर्ट्स में कामयाबी की नई इबारत लिखी

Indian MMA fighter Zeba Bano

भारतीय एथलीट ज़ेबा बानो सामाजिक बंदिशों को तोड़कर कड़ी मेहनत और लगन के दम पर अपने मार्शल आर्ट्स के सपने को जी रही हैं।

23 वर्षीय युवा फाइटर के इसी जज्बे ने अभी तक उनके MMA करियर में सफलता दिलाई है और वो शुक्रवार, 20 मई को थाई स्टार नट “वंडरगर्ल” जारूनसाक का सामना कर दुनिया के सबसे बड़े मार्शल आर्ट्स स्टेज पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराएंगी।

उस शाम “फाइटिंग क्वीन” अपने शानदार 6-0 के रिकॉर्ड के साथ ONE 157: Petchmorakot vs. Vienot के स्ट्रॉवेट मुकाबले में उतरेंगी और वो ग्लोबल स्टेज का इस्तेमाल दूसरों को प्रेरित करने के लिए करना चाहती हैं।

आइए जानते हैं कि कैसे इस युवा स्टार ने कॉम्बैट स्पोर्ट्स का रुख किया और कामयाबी की जिद के दम पर ग्लोबल स्टेज तक आईं।

‘मैं जीवन में कुछ अलग करना चाहती थी’

बानो का जन्म उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में हुआ।

उनके परिवार में मां-पिता के अलावा तीन बड़ी बहनें और एक छोटा भाई और छोटी बहन हैं, जब वो आठ साल की थीं तो उनका परिवार दिल्ली आकर रहने लगा।

भारतीय एथलीट को बचपन से ही खेलों में रूचि थी और स्पोर्ट्स ही उनके जीवन का अहम हिस्सा बनने वाला था।

उन्होंने बताया, “स्कूल के समय मार्शल आर्ट्स ज्यादा पॉपुलर नहीं था और मुझे इसकी अधिक जानकारी भी नहीं थी। लेकिन इस खेल को पहली बार देखने के बाद मेरी इसमें दिलचस्पी बढ़ने लगी इसलिए मैंने वुशु (मार्शल आर्ट) को जॉइन करने के बारे में सोचा था।”

वहां से “फाइटिंग क्वीन” को कॉम्बैट स्पोर्ट्स के प्रति अपने जुनून का अहसास हुआ।

उन्होंने मार्शल आर्ट्स की ट्रेनिंग का आनंद लिया और लगातार अपनी स्किल्स में सुधार करती रहीं और वो भी तब जब ये खेल उतना प्रचलित भी नहीं था।

बानो ने बताया, “मेरा बचपन से ही खेलों में आने का मन था इसलिए मैंने इस ओर आगे बढ़ना ठीक समझा। मैं अपने जीवन में कुछ अलग करना चाहती थी।”

वुशु की कामयाबी के बाद MMA में मिली पहचान

युवा भारतीय एथलीट ने वुशुु में सफलता की सीढ़ी चढ़ना शुरु कर दिया था।

उन्होंने स्ट्राइकिंग आर्ट्स में कई सारे खिताब जीते और ये उनके प्रोफेशनल करियर का बेहतरीन आधार बन गया।

बानो ने कहा, “मैं जिला स्तर और नेशनल लेवल पर भी वुशु खेली हूं और 5 साल तक SAI (स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया) में भी रही और दिल्ली में ट्रेनिंग करती थी।”

“मैंने नेशनल लेवल पर 2 बार स्वर्ण पदक विजेता जीते और सीनियर लेवल पर आने के बाद मैंने किकबॉक्सिंग का रुख किया, जिसमें मैंने नेशनल लेवल पर 4 गोल्ड जीते। केरल में हुए K-1 कॉम्पिटिशन में भाग लेकर मैंने फ्लाइवेट टाइटल भी जीता।”

हालांकि, बानो को लगा कि इस स्टैंड-अप आर्ट में भविष्य सुनहरा नहीं है।

उनकी कामयाबी के बावजूद उन्हें वो नाम हासिल नहीं हो पा रहा था, जिसकी वो हकदार थीं। इस कारण उन्होंने मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स का रुख किया और जल्द ही उन्हें अपनी मेहनत का फल मिलने लगा था।

उन्होंने कहा, “मैं जब नेशनल मेडल जीतकर आती थी तो लोग कुछ खास तवज्जो नहीं देते थे, लेकिन MMA में आने के बाद मुझे फेम मिलना शुरू हुआ इसलिए मैंने MMA को जारी रखने का निर्णय लिया।”

“मैंने 2014 में MMA की ट्रेनिंग शुरू की थी और उस समय भारत में मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स का उतना क्रेज़ भी नहीं था। मेरा ग्राउंड गेम कमजोर हुआ करता था। उस समय की गई कड़ी मेहनत के कारण ही मैं बड़ी उपलब्धियां अपने नाम कर पाई हूं।

“साल 2017 में केरल में एक प्रतियोगिता के दौरान मेरी मुलाकात मेरे अभी के कोच पंकज खन्ना से हुई और तभी से मैं उनके साथ ट्रेनिंग कर रही हूं।”

सामाजिक बंदिशों ने रास्ता मुश्किल किया

वुशु, किकबॉक्सिंग और MMA में कामयाबी के बावजूद बानो के लिए ये सफर बिल्कुल भी आसान नहीं रहा।

हर कोई कॉम्बैट स्पोर्ट्स में उनकी कामयाबी से खुश नहीं था और बहुत से लोग मानते थे कि लड़कियों को फाइटिंग जैसे खेल का हिस्सा बनना ही नहीं चाहिए।

सौभाग्य से, उनके माता-पिता ने समाज के तानों को दरकिनार किया और अपनी बेटी को पूरी तरह समर्थन दिया।

बानो ने कहा, “मेरे परिवार ने मुझे सपोर्ट किया, लेकिन काफी रिश्तेदार इसके खिलाफ थे। हम मुस्लिम समाज से आते हैं। उन्हें मेरे शॉर्ट्स, सैंडो पहनने पर आपत्ति थी और वो मेरे माता-पिता को काफी कुछ कहते थे।”

“मेरे रिश्तेदारों में ही कुछ लोग कह चुके हैं कि अगर मेरे हाथ-पैर टूट गए तो मैं किसी काम की नहीं रहूंगी और मुझसे शादी कौन करेगा?”

इन चुनौतियों ने युवा स्टार के जज्बे को किसी भी तरह कम नहीं किया और ऐसी बातों को अपने सपने के आड़े नहीं आने दिया।

वास्तव में, जो भी ताने उन्हें सुनने को मिलते थे, 23 वर्षीय भारतीय स्टार ने उन्हें प्रेरणा स्त्रोत बनाया और मार्शल आर्ट्स में कामयाबी की कहानी लिखी।

बानो ने इस बारे में कहा, “उन बातों को सुनकर मुझे गुस्सा आता था, लेकिन उन बातों से मुझे आगे बढ़ने का प्रोत्साहन मिलता था और उसी प्रोत्साहन के बलबूते मैं इतने बड़े मुकाम पर पहुंच सकी हूं।”

“मैं असल में मेरे लिए बुरा कहने वाले लोगों का धन्यवाद करना चाहती हूं क्योंकि उनका मेरे यहां तक पहुंचने में बड़ा योगदान रहा है। मेरी बुराई करने वाले लोगों को दूसरों की बुराई करने के बजाय अपने बच्चों को दूसरों की सफलता से प्रेरणा लेने की सीख देनी चाहिए।”

ग्लोबल स्टेज पर आकर दूसरों को करना चाहती हैं प्रेरित

6-0 के शानदार रिकॉर्ड और ONE Championship के साथ कॉन्ट्रैक्ट ने साबित कर दिया कि दूसरों की बातें ज्यादा मायने नहीं रखतीं, जो बात मायने रखती हैं वो हैं – खुद में भरोसा, कड़ी मेहनत और जज्बा।

इसी जुझारूपन के कारण “फाइटिंग क्वीन” अपनी कहानी कह पाई हैं और अब वो युवाओं के लिए रोल मॉडल बनना चाहती हैं ताकि वो सामाजिक बंदिशों से बाहर निकलकर कामयाबी की नई-नई कहानियां लिखें और देश का नाम रोशन करें।

भारतीय एथलीट ने कहा, “आज भी काफी लोग हैं जो अपनी लड़कियों को मार्शल आर्ट्स में नहीं भेजना चाहते।”

“लेकिन मैं इतने बड़े लेवल पर भारत का प्रतिनिधित्व कर रही हूं और लोगों के लिए प्रेरणा का ज़रिया बनना चाहती हूं।”

सर्कल में “वंडरगर्ल” के खिलाफ उनकी पहली चुनौती किसी भी रूप में आसान नहीं होने वाली, लेकिन बानो को मुश्किल चुनौतियां पसंद हैं।

अपने करियर में बानो को काफी सारे ऐसे लोग मिले, जिन्होंने उनके सपनों पर ब्रेक लगाने की कोशिशें की, मगर उन्हें बहुत लोग का समर्थन और प्रोत्साहन भी मिला।

“फाइटिंग क्वीन” उसी समर्थन के दम पर अपने डेब्यू को यादगार बनाते हुए स्ट्रॉवेट डिविजन में अपनी धाक जमाना चाहती हैं।

उन्होंने कहा, “मैं बहुत ज्यादा उत्साहित हूं। अब मेरी मेहनत के फल के रूप में मुझे डेब्यू करने का मौका मिल रहा है।”

“मैं सभी भारतीय फैंस का धन्यवाद करना चाहती हूं कि वो मुझे सपोर्ट करते आए हैं और उनकी दुआओं की वजह से ही मैं इतने बड़े प्रोमोशन में जगह बना पाई हूं और जीत के बाद तिरंगा लहराकर भारत की शान बढ़ाऊंगी।

“ये देश के लिए भी गर्व की बात होगी कि हमारे देश की बेटी जीतकर आए। ONE विमेंस स्ट्रॉवेट वर्ल्ड टाइटल जीतना मेरा सबसे बड़ा सपना है और कोशिश रहेगी कि इंडिया के लिए वो जल्द से जल्द जीतूं।

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