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Throwback Thursday: रहार्डियन ने अपने प्रोफेशनल डेब्यू में मुश्किलों को हराया

स्टेफ़र “द लॉयन” रहार्डियन ग्लोबल स्टेज पर इंडोनेशिया के मुख्य स्टार्स में से एक हैं। उनके मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स सफर की शुरुआत 5 सालों पहले अपने देश में हुई थी।

इस एथलीट ने 12 अप्रैल 2015 को Xtreme Cage Championship (XCC) नाम के स्थानीय प्रोमोशन में डेब्यू किया था और उन्हें वर्दी सुवर्दी पर दूसरे राउंड में जीत मिली थी।

33 वर्षीय स्टार ने बताया, “मुझे वो पल याद है। इसने मेरे ONE Championship में करियर की ओर रास्ता बनाने में मदद की।”

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उन्हें सीधे ही मुकाबला करने का मौका नहीं मिला था। “द लॉयन” को इस इवेंट में मुकाबला करने के पहले काफी ऊंचा पहाड़ चढ़ना पड़ा।

उन्होंने कहा, “मैंने जब XCC में मुकाबला करने के ऑफर को स्वीकारा था, उस समय मैं पैर की चोट से उबरा था और मेरा वजन भी बढ़ गया था।”

“5 महीनों में मैंने 20 किलोग्राम का वजन कम किया क्योंकि चोट से ठीक होते समय मैंने ज्यादा गतिविधियों में हिस्सा नहीं लिया था।”

रहार्डियन को 5 महीने के ट्रेनिंग कैंप में 75 किलोग्राम से 56.7 किलोग्राम तक वजन कम करना था।



ये इंडोनेशियाई ऑफर को अस्वीकार कर सकता था और अन्य इवेंट का इंतजार कर सकता था।

उस समय उनके देश में शो लगातार नहीं हो रहे थे और वो इतना बड़ा मौका छोड़ना नहीं चाहते थे। इस चीज़ का ध्यान रखते हुए “द लॉयन” ने इतने बड़े काम को पूरा करने का प्रयास किया।

उन्होंने बताया, “उस समय मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स के इवेंट्स काफी कम होते थे इसलिए मैं मौके को छोड़ना नहीं चाहता था। मुझे पता था कि इतना वजन कम करने के लिए जबरदस्त मेहनत करनी पड़ेगी।”

“मैंने एंड्रयू लियोन के नेतृत्व में ट्रेनिंग की। मैं दिन में दो बार कठोर ट्रेनिंग करता था। साथ ही मैं उस समय के ट्रेनिंग पार्टनर मारियो सत्य विरावन को भी धन्यवाद कहना चाहूंगा। हमने ये काम कर दिया। मैं दिए गए समय में वजन कम करने में सफल रहा।”

इस मुश्किल को पार करने के बाद अब रहार्डियन पर अपने देश की जनता के सामने अपने पहले प्रोफेशनल मुकाबले में शानदार प्रदर्शन करने का दबाव था।

सुवर्दी एक कठिन प्रतिद्वंदी थे और वो अपने साथ शानदार स्किल्स लेकर आए थे। इसके बावजूद रहार्डियन ने जीत हासिल करने के लिए कई सारी रणनीतियां बनाईं।

Bali MMA के प्रतिनिधि ने कहा, “मैं अपनी कमजोरियां छुपाने का प्रयास कर रहा था। मैं पहले ही ग्रैपलिंग में अच्छा था लेकिन मेरा प्रतिद्वंदी ज्यादा अनुभवी था क्योंकि उन्होंने मुझसे पहले ब्राजीलियन जिउ-जित्सु (BJJ) सीखा था।”

“एंड्रयू ने मुझे बॉक्सिंग सीखने और टेकडाउन करने का तरीका बताया। अगर आप टेकडाउन लगाना चाहते हैं तो बॉक्सिंग स्किल्स जरूरी है। मुझे पता था कि वो चालाक हैं और अनोखे लुक के साथ बाहर आ सकते हैं।

“गेम प्लान उनके लिए अच्छा जाने लगा। शुरुआत में हम दोनों ने स्ट्राइक्स लगाना शुरू किया और उन्होंने ट्रायंगल और आर्मबार लगाने की कोशिश की। दूसरे राउंड में मैंने उस समय तक गति और दबाव को बढ़ाया जब तक मैं रीयर-नेकेड चोक को सही से नहीं लगा पाऊं।”

रहार्डियन उम्मीद लगा रहे थे कि उन्हें जीत मिलेगी। उनके कठोर परिश्रम ने उन्हें मुश्किलों को पार करने का मौका दिया।

वो सर्कल में मौजूद दोनों व्यक्तियों से कम अनुभवी व्यक्ति थे और ये बाउट उनके लिए बड़ी थी। खैर, अंत में उन्हें सबमिशन की मदद से जीत मिली।

उन्होंने बताया, “मैं मानता हूँ मैं अंडरडॉग था लेकिन फिर भी मैंने चीज़ें बदली। मैंने चुनौती स्वीकार की क्योंकि मैं तैयार होना चाहता था। ये मेरा रास्ता था। मुझे उस मौके को हासिल करना था।”

“उस समय मैं पैर की चोट से उबरा था और बहुत सारे लोगों को लगा था कि मेरा सफर खत्म हो चुका है। बहुत सारे लोगों के लिए ये चोट भयानक थी। मेरे लिए ये बतौर एथलीट एक जोखिम था। मैं मान ही नहीं सकता था कि मेरा सफर खत्म हो गया है।”

2016 के एक स्थानीय इवेंट में “द लॉयन” ने एक और जीत दर्ज की और उस जीत ने ONE Championship में मैच तय करने वाले लोगों का ध्यान खींचा।

उन्होंने अगस्त 2016 में रहार्डियन को ONE जकार्ता फ्लाइवेट टूर्नामेंट में आमंत्रित किया, जहां उन्होंने रीयर-नेकेड चोक की मदद से एक ही रात में दो जीत दर्ज की। इस दौरान उन्होंने दुनिया के सबसे बड़े मार्शल आर्ट्स संगठन में अपना स्थान पक्का किया।

हालांकि, अपने डेब्यू में प्रभावशाली प्रदर्शन न कर पाते तो इस मुकाम तक नहीं पहुंच पाते।

उन्होंने कहा, “मेरे लिए वो काफी बड़ी चीज़ थी क्योंकि इसके साथ मैं खुद का नाम बना सकता था।”

“मेरे डेब्यू के बाद 2016 में मुझे IBC [Indonesia Badass Championship] के लिए एक और टाइटल शॉट मिला और मैं उसे जीतने में भी सफल रहा। उन दो जीत की वजह से मैं आज यहां हूँ।”

“मैंने उस साल ONE जकार्ता फ्लाइवेट टूर्नामेंट को जीतकर स्ट्रीक को जारी रखा। ONE का मुझ पर कभी ध्यान नहीं जाता, अगर मैं वो जीत हासिल नहीं कर पाता।”

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