रॉकी ओग्डेन कठिन परिस्थितियों के बावजूद बने मॉय थाई स्टार

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रॉकी ओग्डेन का मॉय थाई का सफर आसान नहीं था। उनका विशिष्ट स्तर के मॉय थाई से काफी जटिल परिचय हुआ था। कुछ पाने की चाहत में वो अपने दम पर घर से दूर रहे। हालांकि, इस दौरान उन्हें कई तरह की परेशानियां हुईं लेकिन उन्होंने खुद को उबारा और युवा एथलीट के रूप में थाइलैंड में बाउट कर नया इतिहास बना दिया।

अब ऑस्ट्रेलिया के 20 वर्षीय वर्ल्ड चैंपियन के पास शुक्रवार, 28 फरवरी को सिंगापुर में ONE Championship के सबसे बड़े पुरस्कार के लिए होने वाले ONE: KING OF THE JUNGLE इवेंट में बाउट करने का मौका है।

ONE स्ट्रॉवेट मॉय थाई वर्ल्ड टाइटल के लिए सैम-ए गैयानघादाओ से होने वाले मैच से पहले ओग्डेन ने बताया कि कैसे वो “आठ अंगों की कला” के गुण को विकसित करने के लिए विपरीत परिस्थितियों में होने के बावजूद उससे निकलकर आगे बढ़े।

बचपन क्वींसलैंड में गुजरा

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ओग्डेन का जन्म ऑस्ट्रेलिया के क्वींसलैंड के रेडक्लिफ में हुआ था। वो अपने पेरेंट्स और तीन भाइयों जोश, नेथन और जैडन के साथ राज्य के सनशाइन तट पर पले-बढ़े थे।

उनके पिता गेविन का कंक्रीट का व्यवसाथ था और उनकी मां इवोन एक स्थानीय अस्पताल के इमरजेंसी विभाग में व्यवस्थापिका के रूप में काम करती थीं। चार बेटों और माता-पिता के बड़े परिवार के साथ भले ही उनका घर छोटा पड़ता था लेकिन वो सब हमेशा एक साथ रहे।

ओग्डेन कहते हैं, “मुझे एक अच्छा परिवार मिला है। हम हमेशा एक-दूसरे के बहुत करीब रहे हैं। मेरे पेरेंट्स ने हमेशा मेरा समर्थन किया है।”

“मैं और मेरे भाइयों में दो-दो साल का अंतर है। मैं घर पर सबसे छोटा था इसलिए कई बार मुझे उनका टॉर्चर सहना पड़ता था। उन्होंने मेरा कोई भी दिन आसानी से नहीं गुजरने दिया लेकिन ये बचपन की सामान्य सी बातें हैं। हम आज भी एक-दूसरे के बहुत करीब हैं।”

अपने भाइयों की तरह परिवार के सबसे छोटा बेटे का झुकाव रोमांचक खेलों की तरफ था। भले ही वो एक सक्षम स्टूडेंट रहे हों लेकिन स्कूल में उनका ज्यादा इंट्रेस्ट नहीं था। वो हमेशा खुद को दूसरी चीजों में फिट करने की कोशिश करते रहते थे।

वो कहते हैं, “मैं जब छोटा था तो हमेशा स्केटबोर्डिंग, सर्फिंग जैसी अलग तरह की चीजों में हाथ आजमाया करता था। मुझे वो स्पोर्ट्स बहुत आकर्षित करते थे, जिनमें रोमांच होता था।”

“मैं हमेशा एक अच्छा स्टूडेंट रहा था। फिर भी मैं बाकी बच्चों की तरह बेहतर नहीं कर पाता था लेकिन मैंने कभी क्लास या कुछ और मिस नहीं किया था। मुझे इतना पता था कि मैं पढ़ाई में आगे बढ़ना वाला नहीं हूं।”

मॉय थाई तक का रास्ता

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Boonchu Gym के प्रतिनिधि की शिक्षा के प्रति कभी रुचि नहीं रही क्योंकि वो मॉय थाई से प्रभावित थे। वो इसी में एक एथलीट के रूप में अपना करियर बनाना चाहते थे।

उनके पिता एक उत्साही मार्शल आर्टिस्ट थे। उन्होंने अपने बेटों को शुरुआत में टायक्वोंडो की शिक्षा दी लेकिन ओग्डेन का झुकाव सबसे ज्यादा पसंद किए जाने वाले खेलों की तरफ था, जिसने उन्हें स्ट्राइकिंग के संपर्क में ला दिया।

उन्होंने बताया, “मेरे पिता को मार्शल आर्ट्स आता था। उन्होंने मुझे और मेरे भाइयों को खुद को बचाने के लिए कुछ तरीके भी सिखाए थे।”

“मैं जब 10 साल का था, तब मैंने टायक्वोंडो में शुरुआत की थी। मैंने करीब एक साल तक इसका प्रशिक्षण लिया और मैं इसमें बेहतर था लेकिन मेरे लिए ये थोड़ा उबाऊ था। भाई ने सलाह दी कि मुझे मॉय थाई ट्राई करना चाहिए तो हम सभी इसकी शिक्षा लेने चले गए। मैंने इसे आजमाया और मुझे बहुत फ्रेश फील हुआ।

“मैं इसमें बेहतर कर रहा था और ये देखकर मैं खुद भी हैरान था। मैं जब 12 साल का था, तब मैंने इसके कुछ मैच खेले थे। इसके बाद मैंने कुछ समय अपने दोस्तों के साथ बिताया। फिर जब मैं 15 साल का हुआ तो मैं इसमें वापस चला गया और मैच करने लगा।”

मुश्किलों के बावजूद नहीं छोड़ा मॉय थाई का दामन

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मॉय थाई में जब ओग्डेन वापस आए तो उन्हें एहसास हो गया था कि इस बुलावे का कोई मकसद है। फिर से वो उस बच्चे की तरह नहीं बनना चाहते थे, जिसने कभी कुछ हासिल नहीं किया था। इस वजह से उन्होंने खुद को इस कला को सीखने के लिए समर्पित कर दिया।

पेरेंट्स ने उन्हें हर तरह से सपोर्ट किया। उन्हें गोल्ड कोस्ट भेज दिया, जहां पर इसकी बेहतर ट्रेनिंग दी जाती थी। हालांकि, उनका बेटा एक कदम आगे निकलना चाहता था और अपने कौशल को अगले स्तर तक ले जाने के लिए मॉय थाई में खुद को पूरी तरह डुबोना चाहता था।

उन्होंने बताया, “मैं अर्बन नाम के एक जिम में ट्रेनिंग ले रहा था और वहां एक थाई ट्रेनर थे। उन्होंने कहा कि मैं मॉय थाई की ट्रेनिंग लेने के लिए बैंकॉक जा सकता हूं। इसके बाद मैं वहां से थाइलैंड चला गया था।”

महज 16 साल की उम्र में वो Pathum Thani जिम में फुल टाइम ट्रेनिंग के लिए “द लैंड ऑफ स्माइल्स” चले गए। हालांकि, ये बिल्कुल भी आसान नहीं था। फिर भी ओग्डेन ने अपनी शिक्षा को पूरा करने और सपने का पीछा करने के लिए सच्चा धैर्य और दृढ़ संकल्प दिखाया।

वो बताते हैं, “ये मेरी पहली ट्रिप थी। मैं प्रशिक्षण के लिए एक महीने बाहर गया। मैंने जिस तरह सोचा था, उतनी अच्छी तरह से ये सब नहीं चला।”

“मेरा मैच हुआ और मैं हार गया। इसके बाद ट्रेनर ने मुझसे बुरा बर्ताव किया। ये मेरे लिए बहुत कठिन वक्त था लेकिन मैंने खुद को इन सबसे बाहर निकाला। मैंने इन चीजों से खुद को ज्यादा प्रभावित नहीं होने दिया। मुझे तब तक ये पता चल गया था कि मॉय थाई का रास्ता आसान नहीं है। मुझे ट्रेनिंग का पुराना पारंपरिक रवैया काफी पसंद आया और मैं कठिन परिस्थितियों के बावजूद उसे ग्रहण करता रहा था। अगर आप किसी खेल में सच्चे दिल से एक मुकाम पर पहुंचना चाहते हैं तो ये चीजें बिल्कुल भी मैटर नहीं करती हैं। मेरे साथ भी कुछ ऐसा ही था।”

“मैं एक समय में करीब छह महीने तक लगातार थाइलैंड में रहना शुरू किया। मैं भाग्यशाली था कि मेरे माता-पिता मेरी मदद कर सकते थे लेकिन ये तब भी कठिन था। मैं लकड़ी के फर्श पर सोता था। अगर मेरे पास बाउट से मिले पैसे नहीं होते थे तो मैं कई बार खाना तक नहीं खा पाता था।

“कोई अंग्रेजी नहीं बोलता था इसलिए मुझे वहां की भाषा को सीखना पड़ा था। फिर भी मैंने अपना जीवन उन्हीं को समर्पित कर दिया क्योंकि ये वही था, जिसको मैं चाहता था। रास्ते में मुश्किलें जरूर आईं लेकिन इसने ही असली में मुझे मॉय थाई का सही रास्ता दिखाया।”

मिल गया बड़ा मौका

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ओग्डेन ने जल्द ही थाईलैंड में अपना नाम बनाना शुरू कर दिया।

17 साल की उम्र में वो WPMF बेंटमवेट मॉय थाई वर्ल्ड टाइटल जीतने वाले पहले ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी बन गए थे। उन्होंने जिस तरह से प्रतिस्पर्धा की थी, उसकी वजह से उनके कई प्रशंसक बन गए थे।

ऑस्ट्रेलियाई एथलीट ने कहा, “मैं जब वापस गया तो मैंने लगातार नौ मैचों में जीत हासिल की। मैंने नॉकआउट से आठ जीत दर्ज की थीं इसलिए मैंने अपना एक नाम बनाया। अच्छी तकनीक और दिल से लड़ने की वजह से थाई लोगों को भी मैं रास आने लगा।”

ओग्डेन जब बैंकॉक में थे, तो एक कोच के जरिए उनकी मुलाकात हमवतन जॉन वेन पार से हुई। फिर उन्होंने अपने देश वापस लौटकर मॉय थाई लैजेंड के साथ मिलकर मुख्य रूप से Boonchu Gym में प्रशिक्षण लेना शुरू किया।

एक लैजेंड के समर्थन और थाइलैंड में उनके अनुभवों ने ओग्डेन को ONE Super Series में बेहतरीन प्रदर्शन करने के लिए तैयार किया। इतना सब मिलने के बावजूद वो बहुत मुश्किल से विश्वास कर पा रहे थे कि उनके सामने जो मौका था, उसे वो पाने के लिए तैयार हैं।

ओग्डेन ने कहा, “ONE में फाइट का मौका मिलना हर उस एथलीट के लिए खास है, जो वर्ल्ड टाइटल के लिए क्रेजी है।”

“यहां पहुंचने के बाद मैं सबसे अच्छी तरह से फाइट कर रहा हूं। ये मेरे लिए किसी भी चीज़ से ज्यादा मायने रखता है। ये बहुत बड़ा मौका है और मैं इसे पाने के लिए जी-जान से कड़ी मेहनत करते हुए अपना सम्मान अर्जित कर रहा हूं। ”

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