मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स

MMA ने ज़ेबज़्टियन कडेस्टम को मुश्किल मानसिक संघर्षों से निकलने में मदद की

अगस्त 3, 2022

आपको कभी ये पता नहीं चलता कि किसी के दिमाग में किस तरह की उथल-पुथल चल रही है और यहां तक कि ज़ेबज़्टियन कडेस्टम जैसे दिग्गज मार्शल आर्टिस्ट को भी ऐसी कठिनाइयों से जूझना पड़ता है, जो उनके आसपास है पर दूसरों को समझ में नहीं आती है।

पूर्व वेल्टरवेट किंग 26 अगस्त को ONE 160: Ok vs. Lee II में यूरी लापिकुस के खिलाफ MMA मुकाबले में वापसी करेंगे। वो जब भी सर्कल में कदम रखते हैं तो किसी भी तरह की चुनौती का सामना करने के लिए हमेशा तैयार रहते हैं।

हालांकि, उन्होंने इस बात को मानना है कि कभी-कभी उन्हें बहुत मुश्किल दिनों का सामना किया है, जिसके बारे में उन्होंने यहां खुलकर बात की।

“द बैंडिट” ने खुलासा किया:

“मैं जब वर्ल्ड टाइटल जीता था, तब मेरी मानसिक स्थिति के साथ कुछ हुआ था। मैं डिप्रेशन में चला गया था और वो मेरे व्यक्तिगत जीवन का काफी कठिन समय रहा था। मैं घर से बाहर नहीं निकलना चाहता था। मैं लोगों के बीच नहीं जाना चाहता था। मैं मानसिक तौर पर काफी खराब हालत में था। मैं काफी ज्यादा उलझन और तनाव से गुजर रहा था और वो काफी कठिन समय था।”

आप समझ सकते हैं कि ग्लोबल स्टेज पर मुकाबले की तैयारी करना अपने आप में काफी मेहनत भरा काम है। ऐसे में अगर आपके मन के अंदर भी एक जंग छिड़ी हुई है तो इससे चीजें और मुश्किल हो जाती हैं।

लेकिन सैभाग्य से कडेस्टम के लिए MMA प्रोत्साहन का सबसे बड़ा जरिया बन गया, जिसने उन्हें चुनौती भरे समय में लगातार आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।

स्वीडिश स्टार ने ONE Championship को बताया:

“जब आप बहुत परेशानी में होते हैं तो ये आपके जीवन से खुशियों को निचोड़ देती है। मुझे नींद से जगना अच्छा नहीं लगता था, बिस्तर से उठना अच्छा नहीं लगता था, यहां तक कि मैं घर से बाहर नहीं निकलना चाहता था। ऐसे में मैं यही सोचता था कि मैं जिम में जाकर फाइट के लिए कैसे तैयारी करूंगा?

“मुझे कभी ऐसा नहीं लगा कि मैं फाइट नहीं करना चाहता हूं। मैं फाइट करना चाहता था, लेकिन उस समय मेरे अंदर भी काफी ज्यादा उथल-पुथल चल रही थी, जिससे मैं जूझ रहा था। अब मुझे लगता है कि मैं वहीं आ गया हूं, जहां से मैंने शुरुआत की थी।

“ये वही चीज है, जिससे मुझे बहुत प्यार है। फाइट के अलावा मुझे किसी दूसरी चीज से उत्साह नहीं मिलता है। फाइट किए बिना मैं जिस दौर से गुजर रहा था, वहां से कभी वापस निकलकर नहीं आ पाता। मुझे लगता है कि यही वो बड़ा बदलाव है।”

जीवन में वापसी से खुश हैं ज़ेबज़्टियन कडेस्टम

ONE वेल्टरवेट वर्ल्ड टाइटल जीतने और उसका बचाव करने के बाद अक्टूबर 2019 में ज़ेबज़्टियन कडेस्टम अपनी बेल्ट कियामरियन अबासोव से हार गए थे और उसके बाद लगातार तीन फाइट में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।

हालांकि, हर हार का असर एक जैसा नहीं रहा।

इससे पहले कि फरवरी में ONE: FULL CIRCLE में वालमीर डा सिल्वा के खिलाफ ज़ेबज़्टियन कडेस्टम जीत की राह पर वापस जाते, “द बैंडिट” ने मुराद रामज़ानोव के साथ तीन राउंड के मुकाबले किया था। उस मैच में हार के बावजूद उन्हें लगा कि वो मानसिक तौर पर पटरी पर लौट आए हैं।

कडेस्टम ने बताया:

“अगर मुराद के खिलाफ आप मेरे मुकाबले को देखें तो हो सकता है कि आप कहें कि ये उनके लिए अच्छी रात रही, लेकिन मुझे मुकाबला करके अच्छा लगा। मुझे ऐसा लगा कि चलो कुछ राउंड तक और मुकाबला करते हैं।”

“मुझे लगा कि मैंने कुछ गलतियां जरूर कीं, लेकिन मेरी तैयारी बहुत अच्छी रही। मैं काफी अच्छी मानसिक स्थिति में था, मैं वहां जाकर काफी अच्छा महसूस कर रहा था। मैं फिर से जिंदगी के करीब आकर और जो मुझे अच्छा लगता है, उसे करके खुश था। यही वो चीज है, जो मैं महसूस करना चाहता था।”

अपने मानसिक स्वास्थ्य से जूझने वाले कई लोगों की तरह ही कडेस्टम के लिए भी ये लगातार संघर्ष बना हुआ है।

साथ ही अब वो संकेतों को पहचानने और अपनी चीजों को पूरी तरह से समझकर संभालने में पहले से कहीं ज्यादा बेहतर बन चुके हैं।

ऐसा करने से स्वीडन के एथलीट के लिए उनके पास मौजूद हर चीज की सराहना करना आसान हो गया है और वो आशा करते हैं कि अगर दूसरे लोग भी ऐसी ही स्थिति का सामना करते हैं तो वो मदद मांगने में संकोच नहीं करेंगे।

“द बैंडिट” ने आगे कहा:

“पिछले एक साल से मैं इस चीज पर काम करने की कोशिश कर रहा हूं और जीवन का आनंद लेने के लिए फिर से वापस आ गया हूं। मेरे सामने अभी भी ऐसे दिन आ जाते हैं, जहां मैं इन चीजों को दरकिनार करने की कोशिश करता हूं और मैं उन चीजों पर उंगली नहीं उठा सकता हूं। ऐसी कोई घटना, स्थिति या कुछ नहीं होता है। कभी-कभी ये चीजें आती हैं और मुझ पर हावी हो जाती हैं।”

“लेकिन मैंने ये सीखा है कि अगर इन चीजों को मैंने हावी होने दिया तो ये लंबे समय तक मुझे घेरे रहने वाली हैं और मैं उस स्थिति में कभी वापस नहीं जाना चाहता हूं इसलिए मैं इससे बचने पर काम करना सीख रहा हूं।”

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