कैसे मॉय थाई ने संघर्षपूर्ण दौर में भी जैकी बुंटान के जीवन को स्थिर रखा

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26 फरवरी को जैकी बुंटान ONE: FISTS OF FURY में ग्लोबल स्टेज पर अपना डेब्यू कर रही हैं, जहां उन्हें वंडरगर्ल फेयरटेक्स की चुनौती से पार पाना होगा।

23 वर्षीय बुंटान Fairtex टीम की मेंबर को अपनी टॉप लेवल की मॉय थाई स्किल्स की मदद से हराकर सुर्खियां बटोरना चाहेंगी, वही स्किल्स जिन्होंने उन्हें कठिन परिस्थितियों से निकाला था।

सिंगापुर इंडोर स्टेडियम में अपने ONE Super Series डेब्यू से पूर्व अमेरिकी एथलीट ने अपने अभी तक के सफर के बारे में बताया।

मॉय थाई के बारे में कैसे पता चला

4 भाई-बहनों में बुंटान सबसे छोटी हैं और उनका जन्म जुलाई 1997 में कैलिफ़ोर्निया में हुआ। उनके बड़े भाई-बहन फिलीपींस की राजधानी मनीला में जन्मे। उनके माता-पिता का नाम रोज़ाली साएंज और जेसी बुंटान हैं।

उन्होंने एशियाई-अमेरिकी के तौर पर जीवन व्यतीत किया है और अपने भाई-बहनों का उनपर गहरा प्रभाव पड़ा है।

बुंटान ने कहा, “मैं सबसे छोटी हूं इसलिए जो भी मेरे बड़े भाई-बहन करते, मैं उनकी नकल करने का प्रयास किया करती थी।”

“मैंने नई-नई चीजों में भी हाथ आजमाए। कुछ समय के लिए मैंने लॉन्गबोर्डिंग भी की, जो काफी हद तक स्केटबोर्डिंग जैसा होता है। मेरी सबसे बड़ी बहन और उनके बॉयफ्रेंड अक्सर लॉन्गबोर्डिंग किया करते थे, उसी कारण मैंने भी ऐसा करना सीखा।”

भाई-बहन के प्रति लगाव से ही बुंटान को मार्शल आर्ट्स के बारे में पता चला। क्रिस, जो अब बुंटान के जीजा बन चुके हैं वो शौक के लिए ट्रेनिंग किया करते थे। बुंटान ने उन्हें राउंडहाउस किक लगाते देखा, तभी युवा स्टार को इस खेल के प्रति एक लगाव महसूस हुआ।

उन्होंने कहा, “मेरी उम्र उस समय 11 साल रही होगी, उस समय इस खेल से मुझे पहली नजर में प्यार हो गया था।”

सबसे पहले बुंटान को ट्रेनिंग के लिए जगह चाहिए थी। उन्होंने इंटरनेट पर सर्च करने के बाद Boxing Works जिम के बारे में पता चला।

उन्होंने बताया, “मेरे घर के करीब अधिकतर जिम में कराटे और टायक्वोंडो सिखाए जाते थे, जिनमें मुझे ज्यादा दिलचस्पी नहीं थी। इंटरनेट पर सर्च करने के बाद Boxing Works के बारे में मुझे पता चला, जो करीब 5 से 6 मील की दूरी पर था। उसके हेड कोच ब्रायन पोपजॉय का साथ मुझे हमेशा से मिलता आया है।”

संघर्षपूर्ण दौर और उससे बाहर निकलने का विकल्प

बचपन में बुंटान को पैसे संबंधी समस्याओं की कभी दिक्कत नहीं हुई, लेकिन उम्र बढ़ने के साथ परिस्थितियां बदलने लगी थीं।

उन्होंने कहा, “मैं अच्छे माहौल में पली-बढ़ी और पैसे की कोई कमी नहीं थी। मैं अपनी मां, बहनों और स्टेपडैड (क्रिस) के साथ रहती थी।”

“मेरी मां और स्टेपडैड को वित्तीय समस्याओं से जूझना पड़ रहा था, लेकिन काम जैसे-तैसे चल रहा था। मैं आठवीं कक्षा में आई, तब हमारी समस्याओं ने विकराल रूप ले लिया था।”

इस संघर्षपूर्ण दौर का उनके परिवार पर बहुत गहरा प्रभाव पड़ा।

बुंटान ने बताया, “स्थिति इतनी खराब थी कि हमें घर भी छोड़ना पड़ा। हमारा कॉलेज फंड, कार, हमने लगभग सब खो दिया था।”

सौभाग्य से, मार्शल आर्टिस्ट की ट्रेनिंग ने उन्हें इस संघर्ष के दौर से बाहर निकलने में मदद की।

उन्होंने कहा, “हाई स्कूल की आधी पढ़ाई पूरी करने तक मुझे अंदाजा नहीं था कि हम कितने बुरे दौर से गुजर रहे हैं। उस समय मेरा फोकस पूरी तरह ट्रेनिंग पर था और यही चीज मुझे आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर रही थी।”

“मैंने मॉय थाई को एक अवसर के रूप में देखा। क्योंकि ट्रेनिंग में हमारा एक शेड्यूल था और हर रोज एक ही तरह की चीजें किया करते थे। जब हमने सब कुछ खो दिया, उस समय मुझसे ज्यादा मेरे माता-पिता और भाई-बहनों पर इसका ज्यादा प्रभाव पड़ा क्योंकि वो मुझसे उम्र में बड़े थे। उस समय मैंने मॉय थाई को इस समस्या से निजात पाने के विकल्प के तौर पर देखा।”

एक तरफ बुंटान का परिवार संघर्षपूर्ण दौर से गुजर रहा था, लेकिन उन्होंने ट्रेनिंग जारी रखी।

उन्होंने कहा, “मेरे कोच, मेरे पार्टनर्स और जिम में किसी को कोई अंदाजा नहीं था कि मेरे जीवन में क्या हो रहा है।”

“मैंने खुद से कहा, ‘अगर मैं इसी जुनून के साथ ट्रेनिंग करती रही तो जरूर इसका परिणाम मेरे पक्ष में ही निकल कर आएगा, इसलिए मुझे ट्रेनिंग जारी रखनी चाहिए।'”



कोच के साथ एक अटूट रिश्ता

एक तरफ परिवार को संघर्ष करना पड़ रहा था, दूसरी ओर बुंटान अपने पहले टूर्नामेंट की तैयारियों में जुटी थीं।

परिस्थितियां कठिन थीं, लेकिन पोपजॉय को अपने कॉर्नर पर देखने से उन्हें खुशी मिल रही थी। उन्होंने टूर्नामेंट को जीता, जिससे उनके कोच के साथ संबंध और भी मजबूत हुए। ये संबंध विश्वास, समझ और दोस्ती पर टिका था।

बुंटान ने कहा, “वो कोच होने के साथ-साथ मेरे अच्छे दोस्त भी हैं। मैं उनके बिना आगे बढ़ने के बारे में नहीं सोच सकती। उनकी समझ और धैर्य की एक फाइटर के तौर पर भी और व्यक्तिगत तौर पर भी सराहना की जानी चाहिए।”

पोपजॉय अपने स्टूडेंट्स की सबसे अच्छी स्किल्स को बाहर निकालना अच्छे से जानते हैं।

बुंटान ने आगे कहा, “उनके जैसा कोच पाकर मैं खुश हूं क्योंकि वो आपको केवल एक अच्छा इंसान और फाइटर ही नहीं बनाते बल्कि आपकी ताकतों, कमजोरियों, आपके स्टाइल जैसी चीजों को ढूंढकर उनमें हमें और भी बेहतर बनाने की कोशिश करते हैं।”

अमेरिकी स्टार ने ये भी कहा कि पोपजॉय को इस खेल का बहुत ज्ञान है इसलिए हर मैच के लिए उन्हें बेहतर गेम प्लान मिलता रहा है।

उन्होंने कहा, “उन्हें मॉय थाई जीनियस कहना गलत नहीं होगा। वो केवल मॉय थाई ही नहीं बल्कि अन्य स्टाइल्स पर भी ध्यान लगा रहे हैं।”

“उनका ज्ञान मेरे लिए मददगार साबित होता आया है और ये प्लान ही मेरे लिए चीजों को आसान कर देता है। मुझे कभी उन्हें गेम प्लान के प्रति अपना नजरिया बताने की जरूरत ही नहीं पड़ी क्योंकि वो पहले ही जान चुके होते हैं कि मैं क्या करने की कोशिश कर रही हूं।”

बुंटान के विचारों को पहले से ही जान लेने की उनके कोच की काबिलियत ने ही युवा एथलीट को ONE Super Series तक पहुंचाया है।

उन्होंने कहा, “पोपजॉय मेरे लिए आत्मविश्वास का बड़ा स्रोत हैं। वो मुझे पहले ही समझा देते हैं कि मैच के समय क्या हो सकता है और क्या नहीं।”

ग्लोबल स्टेज पर बड़े सपनों को लेकर दस्तक

व्यक्तिगत तौर पर बुंटान जिस तरह के संघर्ष से गुजरी हैं, वो उन्हें 26 फरवरी को अच्छा प्रदर्शन करने का प्रोत्साहन देगा। उनका सामना एक खतरनाक एथलीट से होगा, लेकिन वो भी खुद को साबित करने को बेताब हैं।

बुंटान का ध्यान फिलहाल वंडरगर्ल को हराने पर है, लेकिन उन्होंने इससे भी बड़े लक्ष्य तैयार किए हुए हैं।

उन्होंने कहा, “वर्ल्ड चैंपियन बनना मेरा सबसे बड़ा लक्ष्य है और ऐसा करने के लिए मैं कोई शॉर्टकट नहीं अपनाना चाहती। मैं दुनिया को दिखाना चाहती हूं कि बुंटान वर्ल्ड चैंपियन बनने की काबिलियत रखती हैं।”

इस लक्ष्य को प्राप्त करना उनके लिए आसान नहीं होगा, लेकिन बुंटान की अभी तक की उपलब्धियों और व्यक्तिगत तौर पर झेला गया संघर्ष जरूर उन्हें मजबूती से आगे बढ़ने में मदद करेगा।

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