मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स

कैंसर से जूझ रहे अपने पिता के लिए जीत दर्ज करना चाहते हैं अमीर खान

2 महीने पहले अमीर खान की जिंदगी हमेशा की तरह ठीक-ठाक तरीके से चल रही थी। लेकिन एक दिन उन्हें अहसास हुआ कि उनके पिता ताजुद्दीन जरूर किसी गंभीर समस्या से जूझ रहे हैं।

25 वर्षीय स्टार, जिन्हें 9 अक्टूबर को ONE: REIGN OF DYNASTIES के लाइटवेट मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स मैच में राहुल “द केरल क्रशर” राजू का सामना करना है, अपने पिता की तबीयत को लेकर बहुत चिंता में आ गए थे और उन्हें बेड पर लेटाया।

तभी उन्हें दौरा सा पड़ने लगा।

खान ने याद करते हुए बताया, “मेरे पिता कांपने लगे थे।”

“हमने एंबुलेंस को कॉल किया और अस्पताल पहुंचने के बाद उनकी हालत में थोड़ा सुधार आना शुरू हुआ। डॉक्टरों ने उनके कई सारे टेस्ट किए, सीटी स्कैन, ब्रेन स्कैन और एमआरआई भी की। कुछ हफ्ते बाद उनकी बायोप्सी (मेडिकल टेस्ट) भी हुई।”

खान का परिवार टेस्ट की रिपोर्ट के आने का इंतज़ार कर रहा था। वो केवल अंदाजा ही लगा सकते थे कि डॉक्टरों को ताजुद्दीन के मस्तिष्क में आखिर क्या मिला होगा।

खान ने कहा, “मेरी मां अस्पताल में नर्स का काम करती हैं। उन्होंने बताया कि डॉक्टरों को या तो ब्रेन ट्यूमर मिला होगा या फिर कैंसर।”

इस बात को जानने के बाद भी खान परिवार कुछ भी मानने को तैयार नहीं थे। ताजुद्दीन को स्टेज 4 का कैंसर था, जो सीधे तौर पर मस्तिष्क पर प्रभाव डालता है और पूरा नर्वस सिस्टम कमजोर पड़ जाता है। इससे किसी व्यक्ति के व्यवहार और व्यक्तित्व में बदलाव होना आम बात होती है। इसका प्रभाव धीरे-धीरे और भी बड़ा होने लगता है, जिससे कुछ ही महीनों में व्यक्ति की मौत भी हो सकती है।

खान ने कहा, “मैं कुछ भी सोचने और समझने की स्थिति में नहीं था।”

“डॉक्टरों ने जवाब दे दिया था और कहा कि मेरे पिता के पास 3 से 6 महीने बचे हुए हैं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा था कि मेरे पिता के पास अब जीने के लिए ज्यादा समय बाकी नहीं है।

“वो मुझे निराश होकर जीवन व्यतीत करते नहीं देखना चाहते थे, इसलिए मैं हर एक दिन को उनके और अपने लिए यादगार बनाने की कोशिश कर रहा था। क्या पता डॉक्टरों द्वारा दी गई समय सीमा गलत हो जाए।”

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Posted by Singtel Dash on Sunday, February 3, 2019

ऐसा कई बार देखा गया है कि जब स्टेज 4 के कैंसर का इलाज ना किया जाए तो कोई व्यक्ति औसतन 45 दिनों तक ही जीवित रह पाता है। लेकिन इलाज करवाने के बाद भी स्थिति कुछ खास नहीं बदल जाती।

केवल 30 प्रतिशत लोग ही अगले 5 साल तक जीवित रह पाते हैं और इस समय में मरीज को कीमोथेरेपी के भयंकर प्रभाव से जूझना पड़ता है। उसके प्रभाव लिंफोमा से भी भयंकर हो सकते हैं। इसी कारण जब खान के पिता से डॉक्टरों ने पूछा कि वो किस तरह का इलाज चाहते हैं, तो इस पर उन्होंने काफी विचार भी किया था।

लाइटवेट स्टार ने कहा, “उन्होंने कीमोथेरेपी ना करवाने का निर्णय लिया क्योंकि वो बहुत दर्दनाक होने वाली थी। वो अपने जीवन के आखिरी समय में दर्द से नहीं जूझना चाहते थे। इसलिए हम भी उनकी इच्छाओं को किसी भी तरीके से पूरा करना चाहते थे।”



COVID-19 के कारण लगी पाबंदियों और अपने पिता के इलाज के कारण भी वो ट्रेनिंग भी सही से नहीं कर पा रहे थे। खान का जीवन की सबसे कड़वी सच्चाई से सामना हो रहा था और उन्हें अहसास हो रहा था कि जीवन एक अप्रत्याशित चीज है।

उन्होंने बताया, “हमें बुरे दौर का सामना करना पड़ रहा था, लेकिन हम सच्चाई से भी मुंह नहीं फेर सकते थे। हमें केवल बुरे दौर को भुलाकर आगे बढ़ना था क्योंकि सभी के जीवन में ये दौर जरूर आता है। हम जिंदगी से नहीं जीत सकते।”

सच्चाई यही रही कि ताजुद्दीन ने कभी अपने बेटे को इस बात का अहसास नहीं होने दिया कि वो टॉरेट सिंड्रोम से मुकाबला कर रहे थे।

जब खान की उम्र 15 साल थी, उनके पिता अपने बेटे के साथ थाईलैंड गए थे, जहां उभरते हुए एथलीट ने 2 महीने तक ट्रेनिंग की और उसके बाद फुकेत में उन्हें अपना पहला मॉय थाई टाइटल मैच भी मिला।

अमीर खान ने कहा, “4 राउंड्स तक मुझे कड़ी मशक्कत करनी पड़ी और जब आखिरी राउंड शुरू हुआ तो मैं थकान के कारण मैच को बीच में ही छोड़ना चाहता था।”

“लेकिन जब मैं ऐसा सोच रहा था तो एक नजर अपने पिता की ओर देखा और मेरे पिता मेरा मनोबल बढ़ाने के लिए पूरे समय वहीं मौजूद रहे। उन्हीं के कारण मुझे उस मैच में जीत मिली और टाइटल भी जीता।

“वो मेरे करियर की सबसे पहली जीत रही जिसे मैंने उनके साथ सेलिब्रेट किया था।”

लेकिन अभी आने वाले समय में ऐसे कई और मौके भी आने वाले थे।

मॉय थाई करियर के शुरू होने के बाद 2014 में खान ने ONE को एक मिक्स्ड मार्शल आर्टिस्ट के तौर पर जॉइन किया।

पिछले 6 साल में Evolve टीम के स्टार कई बड़े-बड़े मैचों में जीत दर्ज कर चुके हैं और यहां तक कि ONE में सबसे ज्यादा मैचों में नॉकआउट (8) के जरिए जीत का रिकॉर्ड भी उन्हीं के नाम है। हालांकि, अब इस मामले में ONE लाइटवेट वर्ल्ड चैंपियन क्रिश्चियन “द वॉरियर” ली अब उनकी बराबरी कर चुके हैं।

रिकॉर्ड्स बनाना और तोड़ना खान की कभी पहली प्राथमिकता नहीं रही। वो केवल अपने पिता का सिर गर्व से ऊंचा करने के लिए किसी ना किसी यादगार तरीके से मैचों में जीत दर्ज करना चाहते थे।

खान ने कहा, “जब भी मेरा कोई मैच होता तो मैं बैकस्टेज उन्हें अपने साथ लाता और जिस हफ्ते मैच होता मैं उन्हीं के साथ ज्यादा समय व्यतीत करता। जबरदस्त नॉकआउट को देखकर हमेशा उनके चेहरे पर खुशी के भाव आ जाते थे।”

“जब भी मैं किसी मैच में अच्छा प्रदर्शन करता तो मेरे पिता खुशी से झूम उठते और गर्व का भाव उनके चेहरे पर साफ देखा जा सकता थे। वो अपने दोस्तों और हमारे परिवार के सदस्यों को भी इस बारे में बताते, जिससे मैं अगले मैच को भी उसी तरह का फिनिश करने की कोशिश करूं। उनके वो मोमेंट्स मुझे हमेशा याद रहेंगे।”

Singapore mixed martial artist Amir Khan with his dad, Tajudeen, in his corner

अब जब उनके पिता मौत से लड़ाई लड़ रहे हैं, खान ने वादा किया है कि फैंस को एक बार फिर पहले वाला नॉकआउट आर्टिस्ट देखने को मिलेगा। इसलिए नहीं कि वो ONE में सबसे ज्यादा नॉकआउट्स के मामले में ली को पीछे छोड़ना चाहते हैं, बल्कि इसलिए कि वो उस व्यक्ति का सिर एक बार गर्व से ऊंचा कर पाएंगे, जिन्होंने उन्हें हमेशा अच्छा प्रदर्शन करने की प्रेरणा दी है।

खान ने कहा, “मैं अपने पिता के लिए यादगार अंदाज में जीत दर्ज करना चाहता हूं। केवल एक जीत ही नहीं बल्कि राहुल को फिनिश करना चाहता हूं क्योंकि मैच को फिनिश होता देख मेरे पिता को बहुत खुशी मिलेगी।”

“उन्हें खुश देखना और उनकी आंखों में खुशी के भाव देखना ही मेरे लिए सबसे गौरवान्वित कर देने वाला पल होगा क्योंकि मैं अपने पिता से सबसे ज्यादा प्यार करता हूं।”

इस पूरे सफर के दौरान खान का लक्ष्य एक ही रहा है, बस एक ही चीज बदली है कि अब वो उस लक्ष्य को जल्द से जल्द हासिल करना चाहते हैं।

उन्होंने कहा, “मेरा लक्ष्य अभी भी वर्ल्ड चैंपियन बनने का है और मुझे उम्मीद है कि मेरे पिता मुझे अपना सपना पूरा करते हुए देख पाएंगे।”

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