ओपिनियन

Shinya Aoki’s ONE 101: अगल तरह के स्पोर्ट से आते हैं ट्रेनिंग के अलग तरीके

COVID-19 के प्रकोप को रोकने के लिए कई तरह की पाबंदियां लगाई गई हैं। ऐसे में ONE Championship भी अपने इवेंट नहीं करा पा रही है, जिससे एथलीट्स की ट्रेनिंग पर भी असर पड़ रहा है।

इस वक्त पूरा विश्व उलझन में है और कई लोग तनाव में जीवन जीने को मजबूर हैं। ऐसे में बस उम्मीद की जा सकती है कि सब कुछ जल्द ही ठीक हो जाएगा।

जिस तरह फैंस बाउट्स को मिस कर रहे हैं, उसी तरह मार्शल आर्ट्स एथलीट्स भी फाइट और ट्रेनिंग न हो पाने से परेशान हैं।

इसमें किसी की गलती नहीं है। बस हमें थोड़ा और इंतजार करने की जरूरत है, जब तक वही समय वापस लौट कर नहीं आ जाता है। हमें फिर भी अच्छा नहीं लग रहा है क्योंकि हमेशा की तरह ट्रेनिंग नहीं कर पा रहे हैं। मैं इन सबके बावजूद सकारात्मक सोच व मजबूत विचारों के साथ आगे बढ़ना चाहता हूं।

जापान में सरकार ने लोगों से सावधानी बरतने की अपील की है। मैं ऐसे में एक छोटे ग्रुप के साथ ट्रेनिंग कर रहा हूं। मैं ट्रेनिंग में क्रिएटिव बनकर तीन-चार लोगों और एक पर्सनल ट्रेनर के साथ ट्रेनिंग कर रहा हूं।

मुझे लगता है कि ऐसा जापानी लोगों की विशेषताओं और उनकी पर्सनैलिटी के कारण है। हमें कम संसाधनों में भी जीना आता था इसलिए हम हर परिस्थितयों में अच्छा करने की काशिश करते है। मुझे लगता है कि हमारी पढ़ाई के साथ स्वाभाविक स्तर पर ये चीजें हमसे जुड़ गई हैं। हम जापानी काफी कठोर कर्मी होते हैं और हम में काफी सब्र होता है।

इन सब मुद्दों से अलग इन परिस्थितयों में भी हम कैसे ट्रेनिंग जारी रख सकते हैं, इस पर बात करके मैं ये बताना चाहता हूं कि हम हमेशा कैसे प्रैक्टिस करते हैं।

मिक्स्ड मार्शल आर्टिस्ट्स के पास अलग-अलग ट्रेनिंग के तरीके होते हैं। दूसरी ओर, मैं जब जूडो के लिए मुकाबले करता था तो वहां पर विशेष तरह का नियम हुआ करता था। इस वजह से मैं सोचता हूं कि मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स के लिए कोई तय ट्रेनिंग का तरीका न होना काफी दिलचस्प है। मुझे लगता है कि ऐसा इस खेल की विशेषता के कारण है क्योंकि इसमें कई सारी तकनीकें शामिल होती हैं, जिन्हें एथलीट अलग-अलग स्टाइल से कर सकते हैं।

फुटबॉल में गोलकीपर और फॉरवर्ड या बेसबॉल में पिचर्स व कैचर्स की ट्रेनिंग के तरीके अलग होते हैं, जबकि वो एक ही खेल खेलते हैं। ऐसा ही मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स के साथ होता है। ये निर्भर करता है कि कोई स्ट्राइकर है या ग्रैपलर है, उसी के हिसाब से उसकी ट्रेनिंग का तरीका अलग होगा। साथ ही उसके अंदर भी कई तरह की भिन्नता हो सकती है।

इस वजह से मुझे नहीं लगता कि ऐसी ट्रेनिंग का कोई एक सही तरीका हो सकता है। हर एथलीट को व्यक्तिगत तौर पर सोचना होता है और ऐसा ट्रेनिंग रूटीन खुद के लिए बनाना होता है, जो उनके लिए सबसे अच्छा रहे।

अगर अपनी बात करूं तो मैं किसी एक विशेष जिम में ट्रेनिंग नहीं करता हूं। मैं कई जगह ट्रेनिंग करता हूं, जहां दूसरे एथलीट भी आते हैं, ताकि मैं नई स्किल्स सीख सकूं। मैं किसी कोच से किसी एक जिम में सीखने की जगह अपना ट्रेनिंग मेन्यू उसी तरह से चुनता हूं जैसे यूनिवर्सिट में स्टूडेंट्स अपने लिए कोर्स चुनते हैं।

ये आपके लिए समझना आसान होगा। अगर आप मार्शल आर्ट्स को किसी खानाबदोश कर्मी की तरह देखें।

अब क्योंकि मैं किसी एक कोच से ट्रेनिंग नहीं ले रहा हूं इसलिए मुझे अपनी ट्रेनिंग को कंट्रोल में रखने की जरूरत होती है। इस वजह से मैं अपने लिए हर जरूरी ट्रेनिंग और थीम के बारे में सोचता हूं।

ये वास्तव में जापान में काफी जाना-पहचाना तरीका है। मैं अपने पास एक ट्रेनिंग डायरी छोटे नोटपैड के तौर पर रखता हूं। इस तरह से अपनी ट्रेनिंग का हिसाब-किताब रखता हूं।

अगर मैं सिर्फ नंबरों से तुलना करूं तो जितनी ट्रेनिंग इस समय मैं कर रहा हूं, वो दस साल पहले की तुलना में आधी है।

तब मैं सबसे ज्यादा ट्रेनिंग करता था तो दिन में तीन बार डेढ़ से दो घंटे के सेशन होते थे। हालांकि, अब मैं एक दिन में एक सेशन ही करता हूं और संभव हुआ तो दो।

एक दिन में मैंने रिकॉर्ड 25 ग्रैपलिंग स्पारिंग के राउंड किए हैं लेकिन अब मैं छह से आठ राउंड करता हूं। मैंने ये तरीका गलतियां करते हुए सीखा है, जिसमें मेरी उम्र और अवस्था भी शामिल है।

इसके साथ ही जापानी एथलीट अक्सर, तब जिम जाते हैं, जब उन्हें ऐसी स्किल्स सीखनी होती हैं, जो वो अपने जिम या खुद की प्रैक्टिस से नहीं सीख सकते हैं। इसमें उन्हें ऊंचे स्तर के ट्रेनिंग पार्टनर भी मिल जाते हैं।

दूसरे जिम जाने का सबसे बड़ा फायदा ये है कि हमें अलग-अलग स्टाइल के पार्टनरों के साथ ट्रेनिंग का मौका मिलता है। कुछ एथलीट बाउट से पहले अपने होम जिम से दूर ट्रेनिंग करना पसंद करते हैं। मुझे लगता है कि वो असली तनाव का पास से अनुभव करना चाहते हैं जैसे कि उन्हें असलियत के मैच में अनजाने ट्रेनिंग पार्टनर के साथ मिल सकती है।

कई सारी चीजें एथलीट पर निर्भर करती हैं। कुछ मैच से पहले अपनी ट्रेनिंग का तरीका बदल देते हैं। मैं एक ही तरह की ट्रेनिंग करने की कोशिश करता हूं। भले ही मेरी बाउट होने वाली हो या नहीं। ऐसा मैं अपनी उम्र और अनुभव के चलते करता हूं। एक जैसी चीजें मैं इसलिए भी करता हूं क्योंकि इससे मुझे अपना ट्रेनिंग रूटीन नहीं चेंज करना पड़ता है।

कुछ लोग मुझे ट्रेनिंग करते देखकर गंभीर कहते हैं, जबकि मैं गंभीर नहीं हूं। मुझे बस मार्शल आर्ट्स और एक्सरसाइज करना पसंद है।

कई सारे एथलीट मैच के लिए रेगुलर ट्रेनिंग से हटकर कैंप में ट्रेनिंग करते हैं। ये किसी किताब की तरह जांची-परखी थ्योरी है लेकिन मुझे लगता है कि एथलीट्स के लिए अलग चीजें करते रहना जरूरी है, जब तक वो ये समझ रहे हैं कि उनके लिए कौन कौन सी चीजें जरूरी हैं।

तो जब आप उन एथलीट्स के सोशल मीडिया अकाउंट से उनकी ट्रेनिंग की जानकारी निकाल रहे हों तो मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स व एथलीट के हिसाब से अलग ट्रेनिंग रूटीन का विचार दिमाग में जरूर रखें। इस तरह से जब आप उनकी बाउट देखेंगे तो अंतर साफ तौर पर समझ में आएगा और इसे आप ज्यादा पसंद करेंगे।

अब मैं अपने इस कॉलम को यहीं पर ये कहते हुए खत्म करूंगा कि जल्दी ही आप सबके सामने फिर से बाउट करने का मौका लेकर लौटना चाहूंगा।

शिन्या एओकी कई बार ONE लाइटवेट वर्ल्ड चैंपियन रह चुके हैं। वो किताबों के साथ-साथ जापान के मीडिया आउटलेट में कॉलम लिखते हैं। ये सुपरस्टार “Shinya Aoki’s ONE 101” कॉलम लिखते हैं, जिसमें वो एथलीट होने के नजरिए से ढेर सारी जानकारियां देते हैं। लेखक के विचार निजी हैं।