टकेरु सेगावा ने रोडटंग पर TKO जीत और रिटायरमेंट पर बात की – ‘खुश हूं कि मैं सही-सलामत वापस लौट आया’

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29 अप्रैल को टोक्यो के एरियाके एरीना के भीतर जापानी किकबॉक्सिंग दिग्गज टकेरु “नेचुरल बोर्न क्रशर” सेगावा ने ONE SAMURAI 1 में अपने महान करियर का शानदार समापन किया।

मेन इवेंट मुकाबले में 34 वर्षीय आइकॉन ने थाई मेगास्टार रोडटंग “द आयरन मैन” जित्मुआंगनोन को पांचवें राउंड में TKO (तकनीकी नॉकआउट) से हराकर ONE अंतरिम फ्लाइवेट किकबॉक्सिंग वर्ल्ड टाइटल जीता

खिताब जीतने और अपने चिर-प्रतिद्वंदी को मात दने के बाद टकेरु ने मैट पर अपने ग्लव्स रखे और नम आंखों के साथ फैंस से अपने महान करियर की विदाई की।

इवेंट के बाद हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने बताया कि ONE अंतरिम फ्लाइवेट किकबॉक्सिंग वर्ल्ड टाइटल जीतने के उनके लिए क्या मायने हैं।

जापानी सुपरस्टार ने कहा:

“मैं बस बहुत खुश हूं। मैंने नहीं सोचा था कि 34 की उम्र में भी मैं फाइट कर रहा होऊंगा और शारीरिक रूप से भी मुझे नहीं लगता था कि मैं इतना लंबा चल पाऊंगा। लेकिन इतने लोगों के समर्थन की बदौलत मैं एक मार्शल आर्टिस्ट के तौर पर यहां तक पहुंच पाया।

“मैं ONE Championship के सभी स्टाफ का दिल से आभारी हूं। मुझे बेहद खुशी है कि मेरी आखिरी फाइट इसी मंच पर हो रही है।”

दुनिया के सबसे बेहतरीन प्रेशर फाइटर्स में गिने जाने वाले टकेरु के कंधों पर अपने देश की उम्मीदों का भार था।

उनमें फाइट वीक के दौरान काफी आत्मविश्वास झलक रहा था और माना कि अंतिम हफ्ता काफी मानसिक तौर पर दबाव लाने वाला था।

टकेरु ने साझा करते हुए कहा:

“सच कहूं तो अभी तक ये बात पूरी तरह समझ में नहीं आई है क्योंकि मैंने अपनी फाइट दोबारा देखी ही नहीं है। फाइट से पहले मैं कोई कमजोरी दिखाना नहीं चाहता था इसलिए चुप रहा। लेकिन हर दिन मुझे बुरे सपने आते थे जैसे नॉकआउट हो जाना, होश खो देना या पैर टूट जाना।

“मुझे सबसे ज्यादा डर इस बात का था कि कहीं मैं सबकी उम्मीदों पर खरा न उतर पाऊं। इसलिए इस वक्त मेरी सबसे बड़ी भावना यही है कि ‘मैं खुश हूं कि मैं सही-सलामत वापस लौट आया।’”

फाइट के परिणाम का डर किसी दूसरे फाइटर को शायद तोड़ देता, मगर टकेरु अलग ही मिट्टी के बने हैं और उन्होंने हार नहीं मानी।

मार्च 2025 में ONE 172 के दौरान रोडटंग से पहले फाइट के दौरान पसलियां टूटी हुईं थीं। इस बार टकेरु पूरी तरह से शानदार अंदाज में तैयार थे।

उन्होंने कहा:

“ये एक मजेदार अनुभव था। मैं उनके साथ खुलकर पंचों का आदान-प्रदान करना चाहता था। जब मुझे अहसास हुआ कि मेरी 30 साल की मार्शल आर्ट्स की जिंदगी इन पांच राउंड्स में खत्म होने वाली है तो मैं जीतना भी चाहता था। लेकिन मेरे अंदर का एक हिस्सा रोडटंग के और पंच झेलना भी चाहता था। मैं इन्हीं मिली-जुली भावनाओं के साथ फाइट कर रहा था।

“मैंने उनके फाइटिंग स्टाइल पर काफी रिसर्च की थी। रोडटंग जित्मुआंगनोन बाहर से भले ही वाइल्ड तरीके से पंच मारते दिखते हैं, लेकिन उनकी मूवमेंट एक मास्टर की तरह होती है। ये मैंने उन्हें देखकर सीखा। आज मुझे पता था कि उनके पंच बहुत ताकतवर हैं, लेकिन मैं उन्हें झेलने के लिए पूरी तरह तैयार था और उसी ने मुझे टिके रहने में मदद की। साथ ही ये मेरी आखिरी फाइट थी। मैं गिरने से बेहतर मरने के लिए तैयार था इसलिए मैंने हर पंच को झेलते हुए फाइट जारी रखी।”

टकेरु ने अपनी कमजोरी पर ध्यान दिया, जिसने उन्हें कामयाबी दिलाई

ONE अंतरिम फ्लाइवेट किकबॉक्सिंग वर्ल्ड टाइटल हासिल करने के लिए टकेरु सेगावा को अपनी कमजोरियों को पहचानने की खास जरूरत पड़ी।

सालों तक “नेचुरल बोर्न क्रशर” अजेय थे। मगर दुनिया के सबसे बड़े मार्शल आर्ट्स संगठन में आने के बाद उन्हें अपने आप से रूबरू होने का मौका मिला।

टोक्यो निवासी दिग्गज ने बताया:

“ONE में आने के बाद ही मैं अपनी कमज़ोरियों को सही मायने में समझ पाया। जब मैं लगातार जीत रहा था, तब मुझे सच में लगता था कि मैं कभी हारूंगा ही नहीं। लेकिन यहां आने के बाद मुझे अपनी कमजोरियां दिखीं और ये भी अहसास हुआ कि मेरा शरीर धीरे-धीरे टूट रहा है। मैंने इन कमियों को स्वीकार किया, जो मुझे ONE में महसूस हुईं।

“उन्हें ‘पार करना’ नहीं, बल्कि ये समझना ज्यादा जरूरी था कि अब मैं वो चीजें नहीं कर सकता जो पहले कर पाता था। मैं अब भी उसी पुराने तरीके से फाइट करने की कोशिश कर रहा था और यही एक वजह थी कि मेरा शरीर टूटने लगा। मैंने इसे पहचाना और अपना रवैया बदल दिया। चूंकि ये मेरी आखिरी फाइट थी, आज मैंने खुद को पूरी हद तक झोंक दिया चाहे शरीर टूट ही क्यों न जाए। और मैं उस संतुलन को बनाए रखने में कामयाब रहा।”

टकेरु ने बताया कि उनके मन में अब एक और फाइट की चाह नहीं हैं। उन्होंने अंतिम बार रिंग में अपनी पूरी ताकत झोंक दी है।

अब उनका फोकस अपनी विरासत पर टिक गया है। दिग्गज ने याद करते हुए उस समय के बारे में बताया जब महान किकबॉक्सर मसाटो कोबायाशी की रिटायरमेंट के बाद जापानी कॉम्बैट स्पोर्ट्स का पतन हो गया था और अब नहीं चाहते कि वो इतिहास दोहराया जाए।

उन्होंने कहा:

“मेरा एक्टिव करियर आज खत्म हो रहा है, लेकिन मैं नहीं चाहता कि जापानी मार्शल आर्ट्स के लिए जो जुनून है, वो खत्म हो जाए। मसाटो कोबायाशी ने इसको खड़ा किया था, लेकिन जब वो रिटायर हुए तो इसमें गिरावट आई। और उस दौर में मैंने खुद भी मुश्किल समय देखा। जो बच्चे मुझे देखकर मार्शल आर्ट्स में आए हैं और जो आने वाले फाइटर्स हैं, उनके लिए मैं एक बड़ा मंच छोड़कर जाना चाहता हूं।”

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