कुछ खास लोग जिन्होंने भारतीय MMA स्टार कांथाराज अगासा को जीवन में प्रेरणा दी

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“…आपके अंदर कुछ खत्म नहीं हुआ है। अगर आपने अभी हार मान ली तो आपको देखकर जो लोग मेहनत कर रहे हैं, उनको प्रेरित कौन करेगा? उनके लिए रोल मॉडल बनना है ना?”

अगर भारतीय MMA स्टार कांथाराज “कन्नाडिगा” अगासा ने इन शब्दों पर अमल नहीं किया होता तो आज वो मार्शल आर्ट्स के ग्लोबल स्टेज पर परफॉर्म नहीं कर रहे होते।

दरअसल 2018 में लगातार दो हार और निजी कारणों के चलते अगासा ने MMA छोड़ने का फैसला कर लिया था और फिर बेंगलुरु स्थित Koi Combat Academy के कोच विशाल सीगल की इन बातों से प्रेरणा लेकर कड़ी मेहनत में जुट गए और आज वो दुनिया के सबसे बड़े मार्शल आर्ट्स संगठन में भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं

अब शुक्रवार, 26 अगस्त को ONE 160: Ok vs. Lee II में “कन्नाडिगा” का सामना ब्राजील के थालेस नकासू से फ्लाइवेट मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स मुकाबले में होगा।

सीगल की बात मानने के बाद अगासा ने जितेश बंजन की टीम ICSA को जॉइन किया, जहां वो अपने मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स गेम को अलग स्तर पर ले जाने की ट्रेनिंग करते हैं।

बंजन ने भारतीय स्टार के गिरे हुए आत्मविश्वास को ऊपर उठाया और दमदार ट्रेनिंग से एक बेहतर मिक्स्ड मार्शल आर्टिस्ट बनने में मदद की।

इस बारे में उन्होंने कहा:

“जितेश बंजन ने खुले दिल से मुझे अपनी टीम में जगह दी और फिर परिवार के किसी सदस्य की तरह व्यवहार किया। मैं 15 साल से ज्यादा समय से घर से दूर रहा हूं, लेकिन उन्होंने मुझे परिवार की कमी महसूस नहीं होने दी। वो मुझे अपने छोटे भाई की तरह मानते हैं।”

कर्नाटक के मांडलीग्रामा में जन्मे अगासा ने छोटी उम्र से ही रेसलिंग करना शुरु कर दिया था। किसी खिलाड़ी की कामयाबी में उनके माता-पिता का बहुत अहम योगदान होता है, ऐसा ही कुछ इस युवा खिलाड़ी के साथ भी हुआ।

रेसलिंग उन्हें विरासत में मिली थी। उनके पिता उस जमाने में अपने राज्य के जाने-माने रेसलर हुआ करते थे। उनके पिता द्वारा कही गई बातों से उन्हें बचपन में सीख मिली और वो बातें आज भी प्रेरित कर रही हैं।

30 वर्षीय फ्लाइवेट MMA स्टार ने बताया:

“अपने पिता के कारण ही मैं इस खेल में आया। वो हमेशा कहते थे कि कड़ी मेहनत करते रहो, एक दिन सफलता जरूर मिलेगी। इस बात से फर्क नहीं पड़ता कि लोग तुम्हारा साथ दें या नहीं, आप मेहनत करते रहो और कामयाबी भगवान के हाथों में छोड़ दो।

“मेरे पापा हमेशा एक बात बोलते थे कि भले ही किसी दिन मंदिर में पूजा करना छूट जाए, मगर ट्रेनिंग को मिस नहीं करना है। इसके अलावा पापा कहते थे कि हार और जीत तो खेल का हिस्सा होती है, लेकिन प्रदर्शन ऐसा होना चाहिए कि लोग तालियां बजाने पर मजबूर हो जाएं।”

अगासा ने अंडर-14 नेशनल लेवल पर रेसलिंग में शानदार प्रदर्शन किया, लेकिन गांव में सुविधाओं की कमी के चलते उन्हें अपने गृह जिले शिमोगा से बेंगलुरु स्थित स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (SAI) के सेंटर आने का फैसला किया और जूडो की ट्रेनिंग शुरु की।

14-15 वर्ष की उम्र में गांव, घर से दूर रहना हर किसी के लिए मुश्किल होता है, मगर उन्हें अंजान शहर और अंजान लोगों के बीच एक ऐसे गुरु का साथ मिला, जिन्होंने उन्हें अच्छे खिलाड़ी के साथ-साथ अच्छा इंसान भी बनाया।

11-3 के प्रोफेशनल MMA रिकॉर्ड वाले एथलीट ने इस बारे में कहा:

“मैंने एक जूडो के छात्र के तौर पर बेंगलुरु SAI को जॉइन किया था। वो (कोच दस्तगीर अली) बहुत ही अनुशासित व्यक्ति थे। वो सलाह देते रहते थे कि ट्रेनिंग पर भी ध्यान दो और पढ़ाई पर भी।

“वो बताते थे कि लोग क्या कह रहे हैं, इस बात पर ध्यान मत दो, आप सिर्फ अपनी ट्रेनिंग पर फोकस करो। अपनी गलतियों पर काम करोगे तो एक अच्छे खिलाड़ी बनोगे।”

अगासा अब ONE में अपने दूसरे मुकाबले के लिए पूरी तरह से तैयार हैं। उन्होंने अपना ONE Championship डेब्यू पिछले साल मई महीने में शी वेई के खिलाफ किया था, जिसमें उन्हें हार का मुंह देखना पड़ा था।

पिछले साल हुए मां के दिल के सफल ऑपरेशन के बाद अब वो ONE में अपनी पहली जीत दर्ज करने के लिए पूरा दमखम लगा देंगे।

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