स्वर्ग सिधार चुके लिएंड्रो अटाईडिस के पिता आज भी उनके लिए बड़ी प्रेरणा हैं

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लिएंड्रो “वुल्फ” अटाईडिस जब केवल 16 साल के थे तो उन्हें अपने पिता के गुज़र जाने का दर्द झेलना पड़ा था। लेकिन इस बुरे दौर से उन्हें कई सबक सीखने को मिले, इसने उन्हें ना केवल एक अच्छा इंसान बनने में मदद की बल्कि वो वर्ल्ड-क्लास एथलीट भी बने।

इस शुक्रवार, 7 फरवरी को ONE: WARRIOR’S CODE में 5 बार के ब्राजीलियन जिउ-जित्सु वर्ल्ड चैंपियन का सामना रीनियर “द डच नाइट” डी रिडर से होने वाला है। उन्होंने अपने पिता होज़े डोस सेंटोस डामियाओ को कड़ी मेहनत करते देखा है, और लिएंड्रो उस चीज को कभी भुला नहीं पाएंगे।

आज तक भी 33 वर्षीय एथलीट जब भी सर्कल में उतरते हैं तो वो अपने पिता को याद कर प्रेरित महसूस करते हैं।

ONE middleweight contender Leandro Ataides

उन्होंने कहा, “मेरे पिता ब्राजील में होम इंजीनियर का काम करते थे, वो बहुत मुश्किल काम था।”

“वो मुझपर और पूरे परिवार पर बहुत ध्यान देते थे। वो मेरे लिए किसी बड़ी प्रेरणा की तरह हैं और उनके बारे में सोचने पर मुझे बहुत प्रोत्साहन मिलता है। मैंने उनसे बहुत चीजें सीखी हैं। वो हमेशा सही काम करते आए थे और हमेशा मुझे भी सही दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते थे। अपने दिल में मैं आज भी उन्हें आसमान से खुद को देखते हुए देख सकता हूँ।”

अब खुद 3 बच्चों के पिता होने के बाद “वुल्फ” को एहसास है कि उनके पिता ने उन्हें सही दिशा दिखाने और किन चीजों को अधिक प्राथमिकता देनी चाहिए। इन सभी चीजों को समझने में कितनी मदद की थी।

उन्होंने अटाईडिस को सिखाया कि क्या चीजें उनके लिए अधिक महत्व रखती हैं लेकिन उन्हें साथ-साथ वो चीजें भी करनी चाहिए जो उन्हें सबसे अधिक पसंद हो, जिससे उनका आने वाला जीवन सफल हो सके। अब अटाईडिस भी अपने पिता के सिद्धांतों को अपने बच्चों को सिखा रहे हैं।

उन्होंने बताया, “मैं अपने बच्चों को ये सिखाने की कोशिश करता हूँ कि एक परिवार का साथ रहना कितना जरूरी है, एक-दूसरे से प्यार करें, अपने अंदर एक जुनून पैदा करें, वो चीजें करें जो वो करना चाहते हैं क्योंकि ये चीजें मैंने अपने पिता से सीखी थीं।”

“इसके साथ ही कैसे परिवार के प्रति, मेरे भाई और माँ के लिए जो उन्होंने काम किए उनमें कितना प्रेम था। मैं अपने बच्चों को यही चीज सिखाना चाहता हूँ, मैं उनके लिए फाइट करना चाहता हूँ।”



डामियाओ का काम के प्रति लगाव और निःस्वार्थ होना भी उनके बेटे को उन लोगों के लिए त्याग करने के लिए प्रेरित करता है जिनसे वो सबसे अधिक प्यार करते हैं।

जब उन्हें पता चल कि वो एशिया में एक एथलीट होने के साथ-साथ दूसरों को शिक्षा देकर ज्यादा पैसे कमा सकते हैं तो उन्हें अपने बच्चों को ब्राजील में ही छोड़ने का कठिन निर्णय लेना पड़ा था, जिससे वो बच्चों को अच्छी जिंदगी दे सकें।

अटाईडिस ने कहा, “अपने बच्चों से दूर रहना मेरे लिए बहुत मुश्किल है, लेकिन यही चीज मुझे कड़ी मेहनत करने के लिए प्रेरित करती है, जिससे उन्हें किसी दिक्कत का सामना ना करना पड़े।”

“अंत में वो ये देखने वाले हैं कि मैंने उनके लिए कैसा काम किया है, मैंने उनके लिए कितनी कड़ी मेहनत की है और उसके बाद एक दिन हम सभी साथ आकर इन सभी चीजों को सोचकर खुशी मनाएंगे।”

अटाईडिस ने माना कि एक एथलीट और एक पिता होने की जिंदगी में संतुलन बनाए रखना आसान नहीं है लेकिन वो मार्शल आर्ट्स के प्रति भी समर्पित हैं, उसी तरह जैसे उनके पिता कंस्ट्रक्शन साइट्स पर घंटों काम किया करते थे और इस कड़ी मेहनत का फल भी अच्छा ही मिलता है।

वो जानते हैं कि अपनी बेटी और दोनों बेटों को अच्छी जिंदगी देने के लिए और उन्हें सही दिशा में आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने जो कड़ी मेहनत की है उससे उनके पिता को उनपर काफी गर्व महसूस होगा।

Leandro Ataides battles Vitaly Bigdash at ONE: GRIT AND GLORY

इसके साथ डामियाओ काफी रोमांचित महसूस कर रहे होंगे कि उनके बेटे ने किस तरह ग्लोबल स्टेज पर सफल होकर अपने परिवार का सम्मान बढ़ाया है। ये चीज उन्हें ONE वर्ल्ड टाइटल जीतने के लिए भी प्रेरित करती है।

अटाईडिस ने बताया, “ये मेरा काम है इसलिए फिलहाल वर्ल्ड चैंपियन बनने के अलावा मेरा कोई दूसरा लक्ष्य नहीं है।”

“उसके बाद मेरी ये विरासत मेरे बच्चों और मेरे स्टूडेंट्स के साथ भी रहेगी, इसलिए मुझे पता है कि मेरे पिता को मुझपर बहुत गर्व महसूस हो रहा होगा।

“ये जिंदगी कभी-कभी आसान लगती है और कभी कठिन, असल में आसानी से ज्यादा कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है लेकिन ये सब जिंदगी का हिस्सा है। मुझे पता है कि मैंने अपने जीवन में जो कुछ भी हासिल किया है उन्हें मुझपर गर्व महसूस हो रहा होगा।”

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जकार्ता | 7 फरवरी | ONE: WARRIOR’S CODE | टिकेट्सयहां क्लिक करें  

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