नोंग-ओ गैयानघादाओ अत्यधिक गरीबी को पीछे छोड़ कैसे मॉय थाई के लैजेंड बने

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नोंग-ओ गैयानघादाओ का जन्म थाईलैंड के एक बेहद गरीब परिवार में हुआ था लेकिन अपनी जिंदगी मॉय थाई को समर्पित कर वो ना केवल मार्शल आर्ट्स के लैजेंड बने बल्कि इससे उन्होंने अपने परिवार का भविष्य भी सुरक्षित कर दिया है।

अब 33 साल के हो चुके नोंग-ओ ONE बेंटमवेट मॉय थाई वर्ल्ड चैंपियन हैं और अपनी सफलता और शानदार स्किल्स के लिए उन्हें दुनिया भर के लोग सम्मान की दृष्टि से देखते हैं। इसके अलावा उनके विनम्र स्वभाव और ईमानदारी से युवा मार्शल आर्टिस्ट्स उन्हें अपना रोल मॉडल भी मानते हैं।

इस आर्टिकल में आप देख सकते हैं कि कैसे अत्यधिक गरीबी से निकलकर उन्होंने मॉय थाई में इतनी सफलता प्राप्त की है।

थाईलैंड में पले-बढ़े

नोंग-ओ अपने माता-पिता और 2 बड़ी बहनों के साथ साकोन नाखोन प्रांत के एक छोटे से गांव में पले-बढ़े हैं और उनके माता-पिता किसानी कर घर का गुज़ारा चलाते थे।

उनका परिवार खुश था लेकिन साथ में उन्हें काफी कठिनाइयों का भी सामना करना पड़ रहा था। उनके माता-पिता ने कुछ समय बाद अपने बच्चों से दूर बैंकॉक शिफ्ट होकर कंस्ट्रक्शन साइट्स पर काम करने का निर्णय लिया जिससे वो अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा और खाना दे सकें। बच्चे अपनी दादी के साथ रह रहे थे इसलिए उन्हें साल में केवल 1 ही बार अपने बच्चों को देखने का मौका मिल पाता था।

नोंग-ओ ने कहा, “उस समय परिस्थितियां काफी कठिन हुआ करती थीं।”

“जब मैं छोटा था तो हम बेहद गरीब हुआ करते थे। लगभग हर रोज हमें सब्जी और अंडे खाकर पेट भरना होता था। मेरे माता-पिता बैंकॉक में काम कर रहे थे। वो हर महीने पैसे भेजा करते थे लेकिन कभी-कभी उस पैसे से महीने का गुज़ारा नहीं चल पाता था।”

हालांकि, नोंग-ओ ने कहा कि उन परिस्थितियों से उन्हें ज्यादा कमजोर नहीं बनाया बल्कि बहुत छोटी सी उम्र से खुद पर निर्भर रहना सिखाया। वो अपने माता-पिता को मिस किया करते थे और ऐसा काम करना चाहते थे जिससे वो अपने परिवार के लिए पर्याप्त पैसे कमा सकें।

सौभाग्य से ऐसा करने के लिए उन्हें ज्यादा इंतज़ार नहीं करना पड़ा और एक ऐसी राह मिली जो उन्हें पैसे कमाने में मदद कर सकती थी।

मॉय थाई की शुरुआत

Nog-O Gaiyanghadao training at Evolve

जब नोंग-ओ 10 साल के थे तो उनके एक पड़ोसी ने उन्हें मॉय थाई से अवगत कराया, जो गांव के ही एक जिम में ट्रेनिंग दिया करते थे।

पड़ोसी ने उनसे पूछा कि क्या वो किकिंग और पंचिंग को एक मौका देना चाहेंगे। उन्होंने इस सलाह को मानते हुए अपने दोस्तों के साथ अभ्यास करना शुरू कर दिया।

सुविधाओं की कमी के बावजूद नोंग-ओ एक ऐसी जगह अभ्यास कर रहे थे जहाँ वो अपनी स्किल्स को बेहतर कर सकते थे। करीब 1 महीने बाद ही उन्हें अपना पहला मैच मिला जहाँ उन्होंने जीत दर्ज की।

नोंग-ओ ने माना, “शुरुआत में मुझे बॉक्सिंग पसंद नहीं थी। लेकिन इससे मुझे पैसे मिल रहे थे जिससे हमारी वित्तीय स्थिति बेहतर हो रही थी इसलिए मैंने इसे करना जारी रखा।”

जीत के लिए नोंग-ओ को उस समय केवल 100 बाह्त (करीब 3.20 यूएस डॉलर) मिल रहे थे, उससे अगली ही रात उनका अगला मैच हुआ और उसमें भी उन्होंने जीत दर्ज की।

उन्होंने जीते पैसों को अपनी दादी को दिया लेकिन उनके माता-पिता को कोई अंदाजा नहीं था कि उनका बेटा क्या कर रहा है क्योंकि नोंग-ओ को लगता था कि उनके माता-पिता इस फैसले में उनका समर्थन नहीं करेंगे। हालांकि, कुछ समय बाद उन्होंने खुद ही माता-पिता को बताया और नोंग-ओ की स्किल्स को देखकर उन्होंने रोकने के बजाय बढ़ावा दिया।

उन्होंने बताया, “जब तक उन्हें पता चला उससे पहले ही मैं 10 मैचों का हिस्सा बन चुका था।”

“उन्हें मुझे ऐसा करते देख डर भी महसूस होता था लेकिन मैंने आगे बढ़ना जारी रखा और जो भी पैसे मिलते वो माता-पिता को दे देता। करीब 20 मैचों के बाद मुझे उनका पूरा सपोर्ट मिलना शुरू हो गया।”

बैंकॉक में अकेलापन महसूस हुआ

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मॉय थाई के साथ स्कूल में पढ़ाई के साथ सामंजस्य बैठा पाना मुश्किल था। वो सुबह मार्शल आर्ट्स की ट्रेनिंग लिया करते थे इसलिए दोपहर के समय अक्सर वो स्कूल में बेहद थका हुआ महसूस करते थे।

सौभाग्य से नोंग-ओ के शिक्षक और क्लासमेट उन्हें अपना करियर बनाने के प्रति प्रोत्साहन दे रहे थे। स्कूल से उन्हें एक स्पेशल पास मिला जिससे उन्हें पढ़ाई और ट्रेनिंग के बीच कोई मुसीबत ना झेलनी पड़े। उन्हें याद है कि क्लास में जब वो सो जाते थे तो उनके दोस्त, टीचर से बचाने के लिए उन्हें छुपा लिया करते थे।

जब वो 14 साल के हुए तो वो लोकल टूर्नामेंट्स में भाग लेने लगे और बेहतर अवसर प्राप्त करने के लिए बैंकॉक शिफ्ट हो गए। वहाँ उन्हें परिस्थितियों के साथ सामंजस्य बैठाने में काफी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा था।

उन्होंने कहा, “मेरे पहले कोच और मेरे माता-पिता मुझे वहाँ लेकर गए थे।”

“जब मेरे माता-पिता वापस लौट गए तो मुझे रोना आ गया था क्योंकि मैं उनसे कभी दूर नहीं रहा था। जब वो मुझसे दूर भी थे तो मैं अपनी दादी के साथ रह रहा था लेकिन इस बार मुझे नए लोगों के साथ रहना था।

“लेकिन एक समय ऐसा आया जब मैंने रोना बंद कर दिया, मैं पहले से ज्यादा सशक्त महसूस कर रहा था। मुझे अपने लक्ष्य की ओर आगे बढ़ना था।”

बैंकॉक में उन्हें दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था लेकिन ये उनके सफल होने के सफर की शुरुआत मात्र थी। 15 साल की उम्र में उन्होंने आइकॉनिक Rajadamnern Stadium में अपना पहला बड़ा मैच मिला और उसमें उन्होंने स्टॉपेज से जीत दर्ज की।

उसके बाद आखिरकार उन्हें सफलता प्राप्त हुई और 250 से ज्यादा मुकाबलों में जीत दर्ज की। 4 अलग डिविजन में Lumpinee Stadium मॉय थाई वर्ल्ड टाइटल जीते, Rajadamnern वर्ल्ड टाइटल जीता और थाईलैंड फाइटर ऑफ द ईयर अवॉर्ड भी जीता।

महान एथलीट बने

इस सफलता से नोंग-ओ अपने परिवार को गरीबी से निकालने में सफल रहे और आज उन्हें अपनी बेहतरीन इन-रिंग स्किल्स के लिए दुनिया भर में सम्मान की नजरों से देखा जाता है। साल 2015 में जब उन्होंने रिटायरमेंट ली तो उससे पहले वो उतना सब हासिल कर चुके थे जिससे उनका नाम महान एथलीट्स की लिस्ट में शामिल किया जाने लगा।

हालांकि, उनका मार्शल आर्ट्स सफर वहीं समाप्त नहीं हुआ। कुछ समय बाद ही वो सिंगापुर शिफ्ट हो गए जहाँ उन्होंने Evolve टीम को जॉइन किया, ONE ने दुनिया के बेस्ट किकबॉक्सिंग और मॉय थाई एथलीट्स के लिए ONE Super Series का अनावरण किया।

नोंग-ओ के रिंग में उतरने की चाह ने उन्हें कभी अकेला नहीं छोड़ा है, इसलिए अप्रैल 2018 में उन्होंने ग्लोबल स्टेज पर अपने करियर की एक नई शुरुआत की।

उसके बाद से उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा है। 33 वर्षीय एथलीट ONE Super Series के सबसे बेस्ट एथलीट्स में से एक हैं और अपने सभी मुकाबलों में जीत दर्ज की है, एक खास बात ये भी है कि अभी तक वर्ल्ड टाइटल मैचों में उनके नाम सबसे ज्यादा जीत भी है। ग्लोबल स्टेज पर उनकी सफलता के जारी रहने से उनका परिवार अब सुखद जीवन व्यतीत कर पा रहा है और इसी के साथ दुनिया में उनका फैनबेस लाखों में है।

रिटायरमेंट को अब नोंग-ओ पीछे छोड़ चुके हैं और ग्लोबल स्टेज पर अपने चैंपियनशिप सफर को ज्यादा से ज्यादा समय तक जारी रखना चाहते हैं। इससे वो दूसरे लोगों को भी प्रेरित करना चाहते हैं कि इस स्पोर्ट ने उन्हें कितना सब कुछ दिया है और अच्छी मानसिकता के साथ आगे बढ़ने से लोग जो चाहे वो हासिल कर सकते हैं।

उन्होंने कहा, “अगर हम कुछ पाना चाहते हैं तो हमें उसकी चरम सीमा पर पहुंचने के बारे में सोचना चाहिए।”

“अगर आप मुझे एक उदाहरण के तौर पर देखना चाहते हैं तो मैं कभी धैर्य नहीं खोता और कड़ी मेहनत करता हूँ। यहाँ तक कि मैं कभी-कभी हतोत्साहित भी महसूस करता हूँ लेकिन मैंने अपने लक्ष्य की ओर कदम बढ़ाना नहीं छोड़ा है। इससे मेरे परिवार की स्थिति बेहतर बनी रह सकती है इसलिए मुझे धैर्य रखते हुए लगातार आगे बढ़ते रहना होगा।

“मॉय थाई से मुझे जिंदगी के कई सारे सिद्धांत सीखने को मिले हैं। जब कभी आप किसी काम में विफल होते हैं तो ये ना सोचें कि आपको हमेशा ही विफलता हाथ लगती रहेगी। जब भी असफलता आपके हाथ लगती है तो ये सोचकर आगे बढ़ें कि आपका दिन भी आएगा। लगातार प्रयास करते हुए आगे बढ़ते रहना चाहिए। अपना बेस्ट प्रदर्शन करने की कोशिश करें क्योंकि मॉय थाई शारीरिक के साथ-साथ हमें मानसिक मजबूती भी प्रदान करता है।

“इससे आप ताकतवर महसूस करते हैं, इससे आपको अच्छा फाइटर बनने में मदद मिलती है। आपको जीत मिले या हार, हमेशा अपने लक्ष्य के बारे में सोचना चाहिए। अगर मैं मॉय थाई के बारे में सोचता ही नहीं तो आज यहाँ नहीं होता।”

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