‘हमेशा सपने देखो’: मरात ग्रिगोरियन ने साबित किया कि मेहनत का फल हमेशा मीठा होता है

Pound-for-pound kickboxing great Marat Grigorian

एक समय था जब मरात ग्रिगोरियन का किकबॉक्सिंग वर्ल्ड चैंपियन बनने का सपना मुश्किल नजर आता था।

लेकिन कड़ी मेहनत और प्रतिबद्धता की वजह से मुश्किल परिस्थितियों से पार पाते हुए उन्होंने करियर में कई बड़ी उपलब्धियां अपने नाम की हैं।

इतनी सफलता के बाद ग्रिगोरियन का मानना है कि ONE: BIG BANG में इवान कोंद्रातेव के खिलाफ ONE Super Series डेब्यू मैच उनके एक महान एथलीट बनने की शुरुआत है।

ग्रिगोरियन अब मार्शल आर्ट्स के सबसे कठिन डिविजन का हिस्सा बन चुके हैं। ONE फेदरवेट किकबॉक्सिंग रैंक्स और यहां जीत प्राप्त करना एक एथलीट को महान बना सकता है।

शुक्रवार, 4 दिसंबर को सिंगापुर इंडोर स्टेडियम में होने वाले मैच से पहले जानिए किस तरह अर्मेनिया के छोटे से शहर से आने वाले एथलीट कॉम्बैट स्पोर्ट्स सनसनी बने।

अलग-अलग देशों में घर बसाने की कोशिश की

ग्रिगोरियन का जन्म तालिन में हुआ, जो अर्मेनिया की राजधानी येरेवान से 68 किलोमीटर दूर स्थित है।

उनके पिता सैमवेल बावर्ची का काम करते और उनकी मां अमाल्या हेयरड्रेसर थीं। ग्रिगोरियन की 3 बड़ी बहनें हैं और उनके घर का माहौल काफी अच्छा रहा है।

उन्होंने कहा, “तालिन एक बहुत शांत जगह है, जहां बहुत जानवर हैं। ज्यादा समय बाहर खेलने में बिता सकते हैं। मेरे वहां कई दोस्त हैं और वहां मुझे बहुत मजा आता था।”

“मेरा परिवार मेरे स्वास्थ्य के प्रति हमेशा चिंतात्मक रवैया अपनाता आया है और मैं अपने परिवार के बहुत करीब हूं।”

समय बेहद तेजी से आगे बढ़ रहा था। उनके माता-पिता ने अपने परिवार की स्थिति को और भी बेहतर करने के लिए फैसले लिए इसलिए उन्होंने जर्मनी शिफ्ट होने का फैसला लिया और उस समय ग्रिगोरियन की उम्र केवल 3 साल थी। सब अच्छा चल रहा था, लेकिन 3 साल बाद उन्हें एक बार फिर अर्मेनिया भेज दिया गया।

3 बार के किकबॉक्सिंग वर्ल्ड चैंपियन ने कहा, “जर्मनी में सब अच्छा चल रहा था। हम खुश थे, लेकिन हमें वापस अर्मेनिया भेज दिया गया।”

“हमारी स्थिति ठीक नहीं थी क्योंकि हमें दोबारा से शुरुआत करनी थी। वापस जाना काफी अजीब रहा। हम जर्मनी के माहौल में ढल चुके थे और अर्मेनिया का माहौल काफी अलग है और आगे बढ़ने के कम अवसर थे।”

इसके बावजूद ग्रिगोरियन परिवार ने उम्मीद नहीं छोड़ी। उनके माता-पिता ने कड़ी मेहनत कर पैसे बचाए और इस बार उन्होंने बेल्जियम के दरवाजे खटखटाए, उस समय मरात की उम्र 9 साल रही।

उनके लिए एक बार दूसरे देश जाना आसान नहीं था, वो भी एक छोटे बच्चों के साथ लेकिन सैमवेल और अमाल्या जानती थे कि यही उनके लिए ठीक होगा।

उन्होंने कहा, “मेरे माता-पिता ने हर तरह की नौकरी की, जिससे हम यूरोप जा सकें क्योंकि वो जानते थे कि उनके बच्चों को वहां अच्छी शिक्षा और नौकरी मिल सकती थी।”

“जब हम वहां गए, उन्होंने प्रतिदिन 5-6 जगहों पर काम करना शुरू किया। कभी-कभी हमारे लिए खाने को चाय और ब्रेड ही होते थे, लेकिन अब पुरानी बातों को याद कर चेहरे पर मुस्कुराहट आ जाती है। क्योंकि परिवार का साथ रहना ही हमारे लिए सबसे महत्वपूर्ण बात रही।”

मार्शल आर्ट्स के सफर की शुरुआत

बेल्जियम के माहौल में ढलने के लिए युवा ग्रिगोरियन को मुसीबतों का सामना करना पड़ा।

उन्होंने बताया, “वो परिस्थितियां बहुत कठिन रहीं क्योंकि मैं उनकी भाषा नहीं बोलता था, इसलिए नए दोस्त बनाना बहुत कठिन रहा। बात करने के लिए मेरे पास केवल बहने ही थीं, जिनसे मैं हमेशा झगड़ता रहता।”

उसी समय ग्रिगोरियन के पिता ने उन्हें मार्शल आर्ट्स सीखने के लिए कहा। 10 वर्षीय मरात को ब्रूस ली और जैकी चैन की फिल्मों से काफी लगाव होने लगा था। उन्होंने कुंग फू स्कूल में दाखिला लिया, लेकिन वो बहुत महंगा और बहुत दूर भी था।

सौभाग्य से उनके पिता के दोस्तों ने एक अलग सलाह दी।

मरात ने कहा, “मेरे पिता के दोस्तों ने पास के एक किकबॉक्सिंग जिम के बारे में बताया। वो हमारे घर से केवल 200 मीटर की दूरी पर था, इसलिए मेरे पिता ने मुझे वहां भेजा। वो बहुत खुश थे क्योंकि अब मेरी पूरी एनर्जी जिम में लगने वाली थी।”

हालांकि, जिम का अनुभव फिल्मों से काफी अलग रहा, लेकिन ग्रिगोरियन को ये खेल बहुत पसंद आया। नए खेल की चुनौतियां उन्हें पसंद आईं और उन्होंने कुछ नए दोस्त भी बनाए।

उन्होंने मज़ाकिया अंदाज में कहा, “मुझे मजा आ रहा था, लेकिन ट्रेनर्स को शुरू में मैं बिल्कुल पसंद नहीं आया क्योंकि मैं उनकी बातों पर ध्यान नहीं देता था।”

“लेकिन जब मैंने ध्यान दिया तो वो मुझसे बहुत प्रभावित हुए। टीम के एक मेंबर ने मुझे अपने अगले मैच के बारे में बताया, मैं नहीं जानता था कि क्या मैं भी ऐसा करने में सफल रहूंगा, उन्होंने कहा अगर मैंने कड़ी मेहनत की तो मुझे भी जरूर मैच मिलेंगे।”

इसी बात को ध्यान में रखते हुए ग्रिगोरियन ने कड़ी मेहनत की और 12 साल की उम्र में उन्हें पहला मैच मिला। साथियों का साथ और पहले मैच में जीत के बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।

उन्होंने बताया, “मैं बहुत घबराया हुआ था, लेकिन खुश भी था क्योंकि मेरे जिम के कई साथी भी उसी दिन रिंग में उतरने वाले थे।”

“जजों ने मेरे पक्ष में फैसला सुनाया और जीत का अनुभव बेहद शानदार रहा। मैं खुद से कह रहा था, ‘मुझे और ज्यादा मैच चाहिए।’ मैं उत्साहित था और कड़ी ट्रेनिंग कर पहले से भी बेहतर प्रदर्शन करना चाहता था।

“उस समय मैंने K-1 वर्ल्ड चैंपियन बनने का सपना देखा। वो दुनिया की सबसे बड़ी मार्शल आर्ट्स ब्रैंड्स में से एक थी। मैंने कभी नहीं सोचा था कि मुझे इतनी सफलता मिल पाएगी, लेकिन मैं हमेशा इस तरह के सपने देखा करता था।”



एक आखिरी कोशिश

बड़े सपनों को लिए फ्यूचर वर्ल्ड चैंपियन का करियर बहुत धीमी रफ्तार से आगे बढ़ रहा था। रीज़नल टूर्नामेंट्स में भाग लेने के बाद उन्हें मैच मिलने भी मुश्किल होते जा रहे थे।

उन्होंने खुद को एक आखिरी चांस देने के लिए नीदरलैंड्स के ब्रेडा में स्थित Hemmers Gym को जॉइन किया।

उन्होंने कहा, “स्थिति बहुत निराशाजनक रही क्योंकि मुझे मैच नहीं मिल रहे थे। एक साल में केवल 1 या 2 मैच मिल रहे थे और पूरी ट्रेनिंग व्यर्थ जा रही थी।”

“मुझे पैसे कमाने के लिए मैच चाहिए थे लेकिन मेरे ट्रेनर ने मुझसे कहा, ‘कोई तुम्हारे खिलाफ मैच नहीं चाहता।’ मैं बहुत निराश हुआ और मैच जीतने पर भी केवल 100 या 150 यूरो मिलते थे।

“एक दिन मेरे ट्रेनर ने कहा कि स्थिति को बदलने के लिए मुझे जिम बदलने की जरूरत है इसलिए मैंने Hemmers Gym में जाने का निर्णय लिया। यही मेरे लिए आखिरी विकल्प बचा था। अगर इस बार भी कुछ नहीं हुआ तो मैं इस खेल को ही छोड़ दूंगा। मुझे कुछ अलग करना होगा।

“मेरी उम्र बढ़ रही थी और 24 साल की उम्र में भी कुछ हासिल नहीं हुआ था। मैंने Hemmers Gym में ट्रेनिंग शुरू की।”

वर्ल्ड-फेमस जिम से जुड़ने के फायदे उन्हें तुरंत मिलने लगे थे और बड़े-बड़े ऑफर्स भी आने लगे।

ग्रिगोरियन ने कहा, “2 हफ्ते बाद मेरे ट्रेनर ने चीन में मेरे मैच के बारे में बताया और मैं बहुत खुश महसूस कर रहा था।”

“मैंने हर चीज को स्वीकार किया और एक महीने में मुझे 2 से 3 मैच मिल रहे थे। ट्रेनिंग कर खुद को बेहतर बना रहा था। चोट के कारण मुझे ब्रेक भी लेना पड़ा, तब मेरे कोच ने मुझसे K-1 टूर्नामेंट में भाग लेने के बारे में पूछा।”

“मैं विश्वास नहीं कर पा रहा था क्योंकि ये किसी सपने के पूरे होने जैसा था। इसलिए मैंने तुरंत हां में जवाब दिया।”

कई उपलब्धियां प्राप्त कीं

साल 2015 में ग्रिगोरियन ने K-1 वर्ल्ड ग्रां प्री टूर्नामेंट को जीतकर अपने सपने को पूरा किया, जहां उन्होंने एक ही दिन 3 अलग-अलग प्रतिद्वंदियों को नॉकआउट किया था। इसके बाद उनके अंदर और भी अधिक सफलता प्राप्त करने की भूख बढ़ने लगी।

उन्होंने कहा, “मेरे पास ट्रेनिंग करने के लिए केवल 5 हफ्ते थे। मैं बहुत कड़ी ट्रेनिंग कर रहा था, उसके बाद मैं जापान गया और टूर्नामेंट जीता। उस समय मेरी खुशी का कोई ठिकाना नहीं था।”

“वो मेरे लिए एक यादगार लम्हा रहा और मेरे अंदर और भी चैंपियनशिप बेल्ट जीतने की भूख बढ़ने लगी।”

सिल्वर बेल्ट जीतने के बाद उनकी मांग बढ़ने लगी। आगे चलकर साल 2018 में वो Kunlun Fight World MAX टूर्नामेंट के फाइनल में सुपरबोन को हराकर विजेता बने। वहीं, 2019 में अपने पुराने प्रतिद्वंदी सिटीचाई “किलर किड” सिटसोंगपीनोंग को हराकर Glory लाइटवेट वर्ल्ड टाइटल जीता।

अब ग्रिगोरियन ONE के टॉप एथलीट्स को हराकर वर्ल्ड चैंपियन बानने का सपना देख रहे हैं।

अर्मेनियाई एथलीट ने अपने डेब्यू मैच से पहले कहा, “ONE में कई महान एथलीट्स मौजूद हैं और मुझे भी टॉप लेवल के एथलीट के खिलाफ अच्छा परफ़ॉर्म करने का अवसर मिलेगा।”

“जरूर मैं वर्ल्ड चैंपियन बनना चाहता हूं, लेकिन मैं बेस्ट एथलीट्स का भी सामना करना चाहता हूं। मैं किसी भी चुनौती के लिए तैयार हूं और ऐसा प्रदर्शन करना चाहता हूं जिससे लोग मुझे याद रखें।”

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