ONE Fight Night 36 में वापसी कर रहे मॉय थाई सनसनी अकिफ गुलुज़ादा से जुड़ी 5 दिलचस्प बातें

Sean Climaco Akif Guluzada ONE Fight Night 31 31 scaled

शनिवार, 4 अक्टूबर को थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक के लुम्पिनी स्टेडियम से लाइव प्रसारित होने वाले ONE Fight Night 36: Prajanchai vs. Di Bella II के फ्लाइवेट मॉय थाई मैच में अकिफ “किंग” गुलुज़ादा का सामना #5 रैंक के कंटेंडर जाओसुयाई मोर क्रुंगथेपथोंगबुरी से होगा।

मात्र 20 वर्षीय गुलुज़ादा ने खुद को ग्लोबल स्टेज पर परफॉर्म करने वाले सबसे बेहतरीन युवा स्टार्स में से एक बना लिया है।अज़रबैजानी सनसनी ने ONE Friday Fights इवेंट सीरीज में लगातार तीन जीत दर्ज करते हुए मेन रोस्टर कॉन्ट्रैक्ट हासिल किया।

अब ONE Championship में अपराजित स्टार का सामना थाई नॉकआउट आर्टिस्ट जाओसुयाई से होगा, जिन्हें हराकर वो खुद रैंकिंग्स में प्रवेश पाना चाहेंगे।

आइए इस मुकाबले से पहले “किंग” के बारे में खास बातें जानते हैं।

#1 छोटी उम्र से ही परफॉर्म करने लगे

गुलुज़ादा के लिए मार्शल आर्ट्स करियर की शुरुआत बहुत छोटी उम्र से हो गई थी।

15 साल की उम्र तक आते-आते वो प्रोफेशनल एथलीट बन चुके थे और इससे पहले उन्हें एमेच्योर और जूनियर बाउट्स में 200 मुकाबलों से ज्यादा का अनुभव हो गया था।

अपनी दमदार नींव की वजह से वो दबाव में घबराते नहीं हैं और धुरंधरों के खिलाफ भिड़ने में भी असहज नहीं होते। उन्होंने संगठन में अपने शांत स्वभाव, बेहतरीन स्टाइल और फाइटिंग की सूझबूझ से खास पहचान बना ली है।

#2 ONE Championship में अपराजित

गुलुज़ादा ने ONE Friday Fights वीकली सीरीज से दुनिया भर में पहचान बनाई।

अपने दूसरे मुकाबले में उन्होंने सामिंगडम एनएफ लुकसुआन को हराकर और फिर कुछ हफ्तों बाद पुएंगलुआंग बानराम्बा को परास्त कर उनके जीवन की दशा और दिशा बदल गई।

स्पिनिंग बैक एल्बो से किए गए नॉकआउट के दम पर उन्होंने ONE Championship के साथ 1 लाख यूएस डॉलर का कॉन्ट्रैक्ट प्राप्त हुआ। फिर मई में हुए ONE Fight Night 31 में फिलीपीनो-अमेरिकी स्ट्राइकर शॉन क्लिमेको को सर्वसम्मत निर्णय से पराजित कर विजय रथ को आगे बढ़ाया।

#3 ‘किंग’ निकनेम रिंग में उनके आत्मविश्वास को प्रदर्शित करता है

फाइटर्स अक्सर उसी निकनेम का चुनाव करते हैं, जो उनके स्टाइल को सूट करता है।

गुलुज़ादा को “किंग” उपनाम उनके कोच ने दिया था क्योंकि वो कुछ ऐसे ही अंदाज में रिंग में अपनी कला को दिखाते थे।

गुलुज़ादा ने बताया:

“मेरे कोच ने मेरा निकनेम दिया था क्योंकि मुझे लगता है कि मैं रिंग में किंग होता हूं। ये मेरा घर है।”

#4 युवा एथलीट ऑफ द ईयर के रूप में पहचान

साल 2021 में गुलुज़ादा को अपने देश के ग्लोबल स्टार्स अवॉर्ड्स में युवा एथलीट ऑफ द ईयर के सम्मान से नवाजा गया। ये ना सिर्फ गर्व का पल बल्कि एक जिम्मेदारी थी कि अब उन पर बहुत लोगों की नजर है।

इस अवॉर्ड ने उनके लिए ईंधन का काम किया और वो अपनी स्किल्स को और धारदार बनाने के लिए जिम में जुट गए।

उन्होंने याद करते हुए इस सम्मान के बारे में बताया:

“इसने मुझे बहुत प्रेरणा दी क्योंकि मैं बहुत छोटा था। अब मैं 20 साल का हूं। मेरे लिए ये अब भी प्रेरणादायक है।”

#5 रिंग के अंदर और बाहर दोनों जगह अटैकर

मार्शल आर्ट्स के अलावा गुलुज़ादा को फुटबॉल खेलना पसंद हैं, जहां पर वो मुख्य रूप से स्ट्राइकर के रूप में खेलते हैं। उन्हें अटैक करना, व्यस्त रहना और गोल तलाशना पसंद है।

यही मानसिकता लेकर वो फाइट्स में उतरते हैं। वो लगातार आगे बढ़ते हुए पंच लगाते हैं, किक्स थ्रो करते हैं और विरोधियों को ढीला करने का काम करते हैं।

खेल चाहे कोई भी हो, उनका रवैया कभी नहीं बदलता।

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