2-डिविजन वर्ल्ड चैंपियन एनातोली मालिकिन ने अपने शहर जाकर युवाओं से मुलाकात कर प्रेरणादायक कहानी बताई

Arjan Bhullar Anatoly Malykhin ONE Friday Fights 22 50

करीब दो महीने पहले एनातोली “स्लेदकी” मालिकिन ने अर्जन “सिंह” भुल्लर को हराकर वर्ल्ड टाइटल यूनिफिकेशन बाउट में शानदार उपलब्धि हासिल की थी और अब मौजूदा ONE हेवीवेट और लाइट हेवीवेट MMA वर्ल्ड चैंपियन उस जगह गए, जहां से उनके करियर की शुरुआत हुई थी।

2-डिविजन के टाइटल विजेता ने हाल ही में रूस में अपने गृहनगर केमेरोवो का दौरा किया और वो शानदार स्वागत से काफी गदगद नजर आए।

अपराजित और 100 फीसद का फिनिशिंग रेट रखने वाले “स्लेदकी” यकीनी तौर पर दुनिया के टॉप पाउंड-फोर-पाउंड MMA फाइटर्स और ग्लोबल सुपरस्टार हैं।

हालांकि, ये नाम और शोहरत उनके सिर पर नहीं चढ़ी है। वो बड़ी विनम्रतापूर्वक अपने लोगों से मिले और उन ट्रेनिंग पार्टनर्स से भी रूबरू हुए, जिन्होंने उन्हें यहां तक पहुंचाने में मदद की।

रूसी स्टार ने onefc.com को अपनी इस ट्रिप के बारे में बताया:

“मुझे बहुत खुशी है कि मैं अपने होमटाउन केमेरोवो आ पाया। यहां मैं खुद को साइबेरियाई मजबूती, ताकत और एनर्जी से रिचार्ज कर पाया।

“मैंने जिनके साथ पहले ट्रेनिंग की थी, उनसे मिलकर काफी खुशी हुई। मुझे देखकर काफी लोग बहुत खुश थे। हम लोगों ने बातें कीं, बचपन और जवानी की कहानियों को याद किया।”

मालिकिन ने अपने गृहनगर में युवा रेसलर्स से बात की

अपने पुराने दोस्तों से मिलने और खुद को “साइबेरियाई मजबूती” से रिचार्ज करने के अलावा मालिकिन उस जगह भी पहुंचे, जिसने उन्हें एक शानदार एथलीट बनने में मदद की।

उन्होंने कहा:

“मैं जिस रेसलिंग स्कूल में था, वहां के बच्चों से मुलाकात की। मैंने उन्हें अपने पहले कोच से जुड़ा एक किस्सा बताया।”

आज “स्लेदकी” को खतरनाक एथलीट माना जाता है और उनकी ताकत की प्रशंसा की जाती है। उन्हें 13 फाइट्स में कभी भी नतीजे के लिए जजों के स्कोरकार्ड्स को नहीं देखना पड़ा है। उन्होंने साबित किया है कि उनके पास बेहतरीन कार्डियो और सहनशक्ति है।

लेकिन 2-डिविजन वर्ल्ड चैंपियन के साथ हमेशा से ऐसा नहीं था।

मालिकिन ने युवा रेसलर्स को बताया कि उन्हें बचपन में दूसरे बच्चों के साथ बराबरी पर आने के लिए काफी प्रोत्साहन और पोषण की आवश्यकता पड़ी:

“जब हम छोटे थे तो ट्रेनिंग में लंबी दूरी की दौड़ किया करते थे। मैं उन दिनों काफी भारी-भरकम बच्चा हुआ करता था, ऐसे में आगे नहीं दौड़ पाता था। मैं दौड़ में हमेशा आखिर या उससे एक नंबर पहले आता था। लेकिन मेरे कोच मुझे प्यार, चीयर और मेरी मदद करते थे। वो हमेशा आगे दौड़ते थे और उनके हाथ में ब्रेड होती थी।

“उनके पास ब्रेड के छोटे-छोटे टुकड़े होते थे, जिन पर नमक और बटर लगा होता था। जब दौड़ लंबी होती थी तो वो मुझे खिलाते थे ताकि मेरी ताकत और एनर्जी बनी रहे। वो किसी इंसान के प्रति अच्छे व्यवहार का उदाहरण था और मेरे जेहन में उसकी बहुत यादें हैं।”

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