विशेष कहानियाँ

थान्ह ले खुद के एक एथलीट और व्यक्ति के रूप में ढलने के लिए पिता को देते हैं श्रेय

अगस्त 16, 2019

थान्ह ले जब वह बड़े हो रहे थे तो उनके पास आदर्श भूमिका थी। इस शुक्रवार, 16 अगस्त को 33 वर्षीय वियतनामी-अमेरिकी फेदरवेट हीरो – जो ONE: ड्रीम्स ऑफ गोल्ड पर कोतेत्सु बोकु के खिलाफ एक्शन में वापसी करेंगे। उन्हें उनके पिता ने ही मार्शल आर्ट (ताइक्वांडो महारथी) सिखाया था।

जब ले के पिता वियतनाम से संयुक्त राज्य अमेरिका गए तो वह अपने साथ मार्शल आर्ट के अपने परिवार के प्यार को भी ले गए और आखिरकार उन्होंने लुसियाना में एक स्कूल खोल लिया। ले ने यहीं से अपने परिवार के व्यवसाय को सीखने व पिता के नक्शेकदम पर चलने के लिए पहली बार मैट पर कदम रखा था।

Thanh Le defeats Yusup Saadulaev via knockout at ONE: FOR HONOR

ले ने बताया कि उस सयम वह शायद चार या पांच साल के थे। हालांकि उन्हें सही तरह से उम्र याद नहीं है, लेकिन जब पुरानी यादों में जाते हैं तो वह यादें ताजा हो जाती है।

उनके पास उनके पिता का ताइक्वांडो स्कूल है और वह नियमित रूप से वहां जाते हैं। ऐसे में वह जब भी वहां जाते हैं तो उन्हें अपना बचपन याद आ जाता है। उनके पिता अध्यापन और कक्षाएं चलाते हैं।

वह कहते हैं कि उनके पिता उन्हें सफलता के लिए तैयार कर रहे थे, लेकिन उन्हें खुद को इसकी जानकारी नहीं थी। हालांकि वह इसे मज़े के लिए कर रहा था और क्योंकि यह पारिवारिक चीज़ थी और उन्हें ताइक्वांडो में मज़ा आता था।

उस समय तक ले को यह नहीं पता था कि बचपन के अभ्यास के साथ वह आगे चलकर दुनिया के सबसे बड़े मार्शल आर्ट संगठन में एक एथलीट बनेंगे। हालांकि उनके भविष्य के करियर पर उसके पिता का प्रभाव निर्विवाद था। उन्होंने ही ले को विश्व स्तरीय मिश्रित मार्शल कलाकार बनने की नींव दी थी।

ले अब भी अपने पिता के बहुत करीब हैं, जो आज भी अपने परिवार के जिम में ताइक्वांडो सिखा रहे हैं। जबकि वह उनके मुख्य कोच नहीं हैं, ले कहते हैं कि उनके पिता उन्हें मार्शल आर्ट के अनुभव के वर्षों के लिए धन्यवाद देते हैं।

Thanh Le knocks out Yusup Saadulaev at ONE: FOR HONOR

50/50 और मिडसिटी एमएमए में प्रशिक्षण के लिए वह सप्ताह में कई बार जिम जाते हैं और उनके पिताजी वहां रहकर उनमे सुधार के सुझाव देते हैं। खास बात यह है कि वह किसी भी सुझाव को थोपते नहीं है, बल्कि जितना संभव हो उतना उसे प्रायोगिक तौर पर करके समझाते हैं।

वह एक पिता व कोच के रूप में अपनी भूमिका को बेहतर तरीके से समझते हैं। वह जानते हैं कि मेरे मुख्य कौशल क्या है और कैसे इन्हें मजबूत करने में योगदान दिया जा सकता है।

शायद, इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि ले ने अपने पिता से मैट से दूर रहना सीखा था। उन्हें ऐसे मूल्य सिखाए गए थे जो उन्हें अपने व्यक्तिगत और पेशेवर जीवन में एक बेहतर इंसान बनाएंगे।

वह कहते हैं कि यदि वह क्लास थी तो कोई बात नहीं वह मेरी कमियों को दूर कर रहे थे। पिताजी में क्या कुछ नहीं था। उनका नैतिक आचरण, अनुशासन और दृढ संकल्प बहुत ताकतवर था। उसी के कारण वह आज इस जगह पहुंच पाए हैं।

वह समझ समते हैं कि एक बच्चे के रूप में उनके लिए जिम में बहुत लम्बा दिन होता था और फिर रात को वह पढ़ाई करने जाते थे। वही वो चीजें है जिन्होंने मुझ पर प्रभाव डाला। हां, उन्होंने मुझे सिखाया कि एक शानदार किक कैसे फेंकी जाए, लेकिन वे सबसे बड़ी चीजें नहीं हैं जो उन्होंने मुझमें डालीं।

यह वास्तव में महत्वपूर्ण है कि मैं उसे देखता हूं, और मैं अपने बेटे के साथ भी ऐसा ही करने की कोशिश करता हूं।” हां, मैं चाहता हूं कि आप कुशल हों और अपनी प्रतिभा का उपयोग करें, लेकिन एक अच्छा इंसान बनने के लिए क्या महत्वपूर्ण है, और एक उच्च स्तर पर एक एथलीट होने के लिए क्या महत्वपूर्ण है।

इन सबके लिए सबसे महत्वपूर्ण है कड़ी मेहनत, समर्पण, सम्मान और ये सभी मेरे पिता के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण है। हालांकि उनके पूरे परिवार और अन्य लोगों का उनके जीवन पर बड़ा प्रभाव था, लेकिन ले अपनी सफलता के लिए अपने पिता को श्रेय देते हैं।

एलएफए फेदरवेट चैंपियन को पता है कि उनके बिना वह The Home Of Martial Arts में एक विश्व खिताब की ओर नहीं बढ़ पाएंगे और उनके पास खुद के बेटे को आगे बढ़ाने के लिए बिल्कुल सही खाका नहीं होगा। इप सब के लिए, वह सदा अपने पिता के कृतज्ञ रहेंगे।

बैंकॉक | 16 अगस्त | 5PM | ONE: ड्रीम्स ऑफ गोल्ड | टीवी: वैश्विक प्रसारण के लिए स्थानीय लिस्टिंग की जाँच करें | टिकट: http://bit.ly/onegold19