राहुल राजू के लिए अच्छी नौकरी छोड़ मार्शल आर्ट्स में आने का सफर चुनौतियों और मुश्किलों से भरा रहा

Rahul-Raju

भारतीय मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स स्टार राहुल “द केरल क्रशर” राजू अपनी अगली चुनौती के लिए कमर कस चुके हैं। शुक्रवार, 25 फरवरी को ONE: FULL CIRCLE में उनका सामना फिलीपीनो एथलीट ड्रेक्स ज़ाम्बोआंगा से होगा, जहां वो अपनी जीत की लय को बरकरार रखने की कोशिश करेंगे।

वो 2011 में इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के लिए भारत से सिंगापुर आए और यहां आने के बाद उन्हें मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स से प्यार हो गया। 30 वर्षीय स्टार अपने खाली समय में इसकी ट्रेनिंग में जुट गए।

उन्होंने कॉलेज की पढ़ाई के बाद नौकरी शुरु की, लेकिन अहसास हुआ कि अगर वो इस खेल में करियर बनाना चाहते हैं तो पूरा समय देना होगा।

अब सिंगापुर इंडोर स्टेडियम में होने वाले इस मुकाबले से पूर्व राजू ने बताया कि उन्होंने नौकरी छोड़ने से लेकर अब तक के सफर में किन चुनौतियों का सामना किया।

नहीं मिला परिवार और दोस्तों का समर्थन

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Juggernaut Fight Club के स्टार का नौकरी छोड़ना परिवार को रास नहीं आया। असल में वो पहले इंजीनियर हुआ करते थे, लेकिन इस खेल से जुड़ने के लिए उन्हें अपनी फुल टाइम जॉब को छोड़ना पड़ा था, लेकिन उनका परिवार इस फैसले के समर्थन में नहीं था।

उन्होंने कहा, “जब मैंने उन्हें (घर पर) बताया कि मैं फुल टाइम जॉब छोड़ने वाला हूं तो वो खुश नहीं थे। उन्हें समझने में कई साल लगे और आज भी वो इससे खुश नहीं हैं, लेकिन मुझे फर्क नहीं पड़ता।”

“मैंने इसके लिए कड़ी मेहनत की है और उनकी हर संभव तरीके से मदद करता आया हूं। कभी-कभी आपको अपने लिए स्वार्थी होना पड़ता है। मुझे उम्मीद है कि मैं उन्हें गलत साबित कर उनका सिर गर्व से ऊंचा कर पाऊंगा।”

ऐसा नहीं था कि पूरा परिवार “द केरल क्रशर” के फैसले के खिलाफ खड़ा था। इस बीच उन्हें अपने भाई के कारण आगे बढ़ने का प्रोत्साहन मिला।

राजू ने कहा, “मेरे भाई ने मेरा समर्थन किया और वो मेरे फैसले को समझ रहे थे। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि शायद हम एक ही जनरेशन से आते हैं। वो मुझसे एक साल छोटे हैं इसलिए शायद वो समझ रहे होंगे कि मैं क्या सोच रहा था और अंत में उन्होंने मेरा पूरा सपोर्ट किया।”

राजू के लिए केवल परिवार ही नहीं बल्कि दोस्तों की ओर से भी नौकरी ना छोड़ने का दबाव आ रहा था।

इस संबंध में उन्होंने कहा, “मेरे अधिकतर दोस्त मुझे नौकरी ना छोड़ने की सलाह दे रहे थे क्योंकि उन्होंने इस क्षेत्र में लोगों को सफल होते नहीं देखा था। कुछ ही दोस्त ऐसे रहे जिन्होंने मेरे फैसले का सम्मान किया।”

नौकरी छोड़ने के बाद शुरु हुई असली संघर्ष की कहानी

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किसी भी व्यक्ति के लिए नौकरी छोड़ने के बाद का सफर बहुत संघर्षपूर्ण रहता है। उसी तरह राजू को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ा, लेकिन एक चीज़ हमेशा उनके पास रही, वो थी उनकी प्रतिबद्धता।

नौकरी छोड़ने के बाद सामने आई मुश्किलों के बारे में बताते हुए राजू ने कहा, “सबसे बड़ी दिक्कत पैसों की थी, जिससे निजात पाने में मुझे बहुत साल लगे। मगर मैं इन चुनौतियों का डटकर सामना करने को तैयार थे। मैं सच कहूं तो मुझे अपना भविष्य नजर आ रहा था और अपने फैसले पर पूरा भरोसा भी था।”

भारतीय एथलीट ने 2018 में अपना ONE Championship डेब्यू किया, लेकिन उनके लिए शुरुआत खास नहीं रही। मगर चुनौतीपूर्ण दौर को पीछे भुलाते हुए उन्होंने अगले साल लगातार मैचों में जीत दर्ज कीं।

उस हार के दौर को भुलाना “द केरल क्रशर” के लिए बिल्कुल भी आसान नहीं था।

उन्होंने कहा, “शुरुआत में मुझे हार मिलीं, जिनमें से शेनन विराचाई के खिलाफ हार मेरे लिए सबसे ज्यादा निराशाजनक रही।”

“मैं दूसरी और तीसरी फाइट में इस मानसिकता के साथ उतरा था कि मुझे जीत या हार से मतलब ना रखते हुए केवल अपना सर्वश्रेष्ठ देना है। अमीर खान और उसके बाद अहमद मुज़तबा से सामना हुआ। मुझे लगता है कि मैं उन मैचों में अपना बेस्ट नहीं दे पाया इसलिए खुद से भी निराश था।”

‘मेरे लिए MMA ही है सपनों की दुनिया’

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राजू बहुत लंबा और चुनौतीपूर्ण सफर तय करते हुए इस मुकाम पर पहुंचे हैं और वो मानते हैं कि बुरे समय के बाद अच्छा समय भी जरूर आता है।

उन्होंने कहा, “मेरा जीवन इस समय MMA और जिउ-जित्सु के इर्द-गिर्द घूम रहा है। चाट्री ने The Apprentice में कहा था कि आपको रोज अपना सर्वश्रेष्ठ देते हुए आगे बढ़ना होता है।”

“मुझे खुद पर गर्व है और अपनी मेहनत पर भरोसा है। आगे कितना ही कठिन सफर क्यों ना हो, लेकिन मैं जानता हूं कि मैं उसे पार कर पाऊंगा।”

राजू को इस खेल से बहुत लगाव है और अगर उनके सामने कभी MMA और एक 9 से 5 की नौकरी के बीच में दोबारा चुनाव करने की स्थिति उत्पन्न हुई तो वो हमेशा उसी चीज़ का चुनाव करेंगे, जहां उनका दिल लगता है।

“द केरल क्रशर” ने कहा, “मैं हमेशा MMA का चुनाव करूंगा, मुझे लगता है जैसे मैं किसी सपने में जी रहा हूं। मैं अपने जुनून को फॉलो कर रहा हूं, जो बहुत कम लोग कर पाते हैं। मार्शल आर्ट्स एथलीट होने पर मैं गर्व महसूस करता हूं इसलिए ऐसी स्थिति दोबारा आने पर मैं हमेशा MMA का चुनाव करूंगा।”

राजू के लिए एक समय पर मुश्किलें इतनी बढ़ने लगी थीं कि उन्होंने अपने MMA करियर पर सवाल खड़े करने शुरू कर दिए थे, लेकिन उन्होंने खुद पर और अपनी मेहनत पर भरोसा बनाए रखा।

उन्होंने कहा, “मैंने कभी MMA छोड़ने पर विचार नहीं किया, लेकिन खुद से सवाल जरूर किया कि, “क्या मैं इस खेल के लिए सही हूं?” मैंने कई बार खुद से सवाल किए, लेकिन मैं जानता था कि एक दिन मैं जरूर दूसरों को गलत साबित करूंगा और अपनी मेहनत पर भरोसा रखते हुए आगे बढ़ता रहा हूं।”

अपनी पिछली फाइट में राजू ने ओट्गोनबाटर नेरगुई को हराकर जीत की लय वापस प्राप्त की थी। अब उन्हें उम्मीद होगी कि वो 25 फरवरी को ड्रेक्स ज़ाम्बोआंगा को हराकर इस जीत की लय को कायम रखेंगे।

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