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3 मार्शल आर्ट्स जिन्होंने इंडोनेशियन एथलीट्स को दमदार बनाया

अक्टूबर 26, 2019

कई सैकड़ों सालों से इंडोनेशिया दक्षिण-पूर्वी एशियाई मार्शल आर्ट्स का गढ़ रहा है। इंडोनेशिया की नई पीढ़ी के कई सारे मिक्स्ड मार्शल आर्टिस्ट्स ने ONE: DAWN OF VALOR में हिस्सा लेकर अपने टैलेंट का जलवा बिखेरा।

इंडोनेशिया में ONE चैंपियनशिप की वापसी के बाद नजर डालते हैं इस देश के 3 सबसे पॉपुलर मार्शल आर्ट्स पर।

एशिया के दक्षिण-पूर्व का सूमो

पैनकेक सिलेट एक सेल्फ-डिफेंस मार्शल आर्ट्स है, जिसका संबंध करीब 17वीं शताब्दी में सुमात्रा और जावा से रहा है। आत्म-रक्षा के अलावा पैनकेक सिलेट को शादी समारोह, चावल की खेती के अलावा कई मौकों पर भी परफॉर्म किया जाता है।

इसमें मुख्य रूप से स्ट्राइकिंग, ग्रैप्लिंग और फेंकने पर ध्यान दिया जाता है लेकिन इंडोनेशिया के विभिन्न हिस्सों में इसमें थोड़ा सा बदलाव भी देखने को मिलता है।

तटीय इलाकों में पैनकेक सिलेट की प्रैक्टिस करने वाले ज्यादातर लो स्टांस (झुककर खड़े रहना) और हैंड टू हैंड तकनीक का अधिक इस्तेमाल करते हैं। पहाड़ी इलाकों में प्रैक्टिस करने वाले स्टूडेंट हाई स्टांस और पैरों की तकनीकी यूज़ करना पसंद करते हैं।

आज के समय में इंडोनेशिया में पैनकेक सिलेट मार्शल आर्ट्स के करीब 150 से ज्यादा तरीके हैं। ये उन चुनिंदा मार्शल आर्ट्स में शामिल है, जिसमें दक्षिण-पूर्व एशियाई गेम्स में जगह मिली।

इंडोनेशिया की फोर-मैन बॉक्सिंग बाउट्स

तिंजु का मतलब होता है “मुक्कों से फाइटिंग” और इसे इंडोनेशियन बॉक्सिंग के रूप में भी जाना जाता है। इसका ताल्लुक इंडोनेशिया के फ्लोर्स द्वीपों से है और ये बाजावा शहर का सबसे पॉपुलर मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स है।


फ्लोर्स में होने वाले तिंजु मैचों में 4 लोग शामिल होते हैं, जिनमें 2 बॉक्सर्स और 2 गाइड होते हैं। दोनों बॉक्सर्स एक दूसरे का सामना करते हैं, जबकि गाइड, बॉक्सर्स के पीछे खड़े होकर उन्हें निर्देश देते हैं।

तिंजु में किक और थ्रो (धकेलने) की मनाही होती है, लेकिन एथलीट खुले या बंद हाथों और कोहनी से हमला कर सकते हैं। तिंजु मैचों को पाइंट स्कोर कर जीता जाता है।

हैंड टू हैंड लड़ाई

ये बाकी दो स्टाइल की तरह इतना पुराना नहीं है, लेकिन तरूंग डेराजट एक ओरिजिनल मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स है, जिसमें 1960 के दशक में अचमड ड्राड्जट द्वारा स्थापित किया गया।

Aa बॉक्सर्स को ड्राडजट के रूप में बुलाया जाता है। इसमें हाथों और पैरों के द्वारा किए गए अटैक के अलावा टेकडाउन (गिराना), लॉक, लेग स्वीप्स जैसे तकनीकें भी शामिल हैं।

तरूंग डेराजट को आधिकारिक रूप से एक राष्ट्रीय खेल का दर्जा भी प्राप्त है और इसे इंडोनेशियन आर्मी और पुलिस मोबाइल ब्रिगेड की बेसिक ट्रेनिंग में भी शामिल किया गया है। 90 के दशक में इसे खेलों की प्रतियोगिता के रूप में परफेक्ट किया गया।

उसके बाद से, इसे इंडोनेशियन नेशनल कमेटी ऑफ स्पोर्ट्स द्वारा आधिकारिक रूप से मान्यता प्राप्त है और इसे नेशनल स्पोर्ट्स वीक में भी जगह मिली हुई है। तरूंग डेराजट को 2011 के दक्षिणपूर्व एशियन गेम्स में शामिल किया गया।

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