ONE वर्ल्ड टाइटल चैलेंजर एलेक्स रॉबर्ट्स करियर के सबसे बड़े मौके के लिए तैयार – ‘मैं किसी सपने में हूं’

AlexRoberts TrainingCamp 1200X800

एलेक्स “द वाइकिंग” रॉबर्ट्स इस बात का जीता जागता सबूत हैं कि अपने सपनों को पूरा करने की कोई उम्र नहीं होती।

ऑस्ट्रेलियाई स्ट्राइकर ने 20 की उम्र के बाद मॉय थाई की ट्रेनिंग शुरु की थी। अब दस साल बाद ONE Fight Night 17 में होने वाले पहले ONE हेवीवेट मॉय थाई वर्ल्ड टाइटल मैच में उनका सामना यूक्रेनियाई सुपरस्टार रोमन क्रीकलिआ से होगा।

देरी से करियर की शुरुआत करने वाले रॉबर्ट्स 9 दिसंबर को होने वाले इवेंट को हेडलाइन कर साबित करेंगे कि जुनून और जज्बा हो तो किसी भी मोड़ पर कामयाबी पाई जा सकती है।

थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक के मशहूर लुम्पिनी बॉक्सिंग स्टेडियम में होने वाले वर्ल्ड चैंपियनशिप मैच से पहले “द वाइकिंग” के सफर पर एक नजर डालते हैं।

पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया में बचपन के सपने

रॉबर्ट्स का जन्म पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया के पर्थ के शहर वॉलिस्टन में हुआ।

ऑस्ट्रेलिया के इस हिस्से में फुटबॉल का काफी चलन है और उन्हें इस खेल के जरिए अपने युवा जोश को काम में लाने का मौका मिला:

“मेरी परवरिश एक कस्बे में माता-पिता और तीन बहनों के साथ हुई। फुटबॉल खेलते हुए मेरा बचपन काफी सामान्य रहा। इसके अलावा कभी-कभी फाइट हो जाती थी। मैं इसमें काफी नेचुरल था।”

परिवार का अच्छा समर्थन होने के बावजूद रॉबर्ट्स को स्कूल के शुरुआती दिनों में संघर्ष करना पड़ा और वो क्लास के अंदर होने की बजाय बाहर ज्यादा समय बिताया करते थे।

90 के दशक की फिल्मों के एक्शन हीरोज़ को देखकर उनमें मार्शल आर्ट्स के प्रति प्यार जागा, लेकिन उनके व्यवहार के चलते माता-पिता ने इस रास्ते पर नहीं जाने दिया।

उन्होंने बताया:

“मैंने आर्नोल्ड श्वारजेनेगर और जॉन-क्लॉड वैन डैम की फिल्मों को देखना शुरु कर दिया था। मेरी परवरिश ऐसी ही है और इनका मुझ पर खासा प्रभाव था। इस वजह से मैं उनकी तरह बनना चाहता था।

“मेरे माता-पिता ने मुझे एक दो क्लास जॉइन करवाई और सोचा, ‘ये एक बुरा आइडिया है। हम इसे ज्यादा हथियार दे रहे हैं।’ क्योंकि मैं प्राइमरी स्कूल में ज्यादातर समय प्रिंसिपल ऑफिस के बाहर बिताता था।

“तो उन्होंने मुझे वहां से निकाल लिया और दूसरे खेलों में हिस्सा लिया।”

मॉय थाई से हुआ प्यार

रॉबर्ट्स अपनी युवावस्था के दिनों में फुटबॉल से ही जुड़े रहे। हालांकि, ये उनके लिए करियर नहीं होने वाला था, मगर एक्टिव रहने के लिए अच्छा रास्ता था।

फिर ये उनके झगड़ों से दूर रखने के लिए ये पर्याप्त नहीं था। उन्होंने अपना नकारात्मक रवैया सुधारने के लिए कॉम्बैट स्पोर्ट्स से जुड़ना ठीक समझा।

उन्होंने बताया: 

“मैंने 24 साल की उम्र में मॉय थाई की ट्रेनिंग शुरु की। मैं काफी झगड़ों में पड़ रहा था। मुझे लगा कि मैं इस खेल में अच्छा हो सकता हूं।

“मैं जिम गया और जैसे ही मैंने Synergy and Thai Boxing Pit में कदम रखा, मुझे इससे प्यार हो गया।

“मैं मॉय थाई से पहले बॉक्सिंग क्लास में गया। वहां 10-पंच कॉम्बिनेशन चल रहा था। फिर मैंने दूसरी तरफ देखा तो कुछ लोग किक, नी, एल्बो का इस्तेमाल कर रहे थे। ये ज्यादा घातक और सरल लग रहा था और मैंने सोचा, ‘ये स्टाइल मेरे लिए है।'”

“द वाइकिंग” को जल्दी अहसास हुआ कि वो प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेना चाहते हैं।

कुछ लोग सिर्फ नई स्किल्स सीखने और फिट रहने के लिए ट्रेनिंग करते हैं, लेकिन उनके अंदर अलग ही ज्वाला जल रही थी और उनका रिंग में फाइट करना तय लग रहा था।

उन्होंने याद करते हुए बताया:

“मुझे पता चल गया था कि मैं फाइटर बनना चाहता हूं। मैं रिंग में जाकर खुद को टेस्ट करना चाहता था। मैं सिर्फ प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेना चाहता था।

“मुझे मुकाबले करना पसंद है। सर्वश्रेष्ठ लोगों के साथ मुकाबला करने में मजा है। ये जीतने से भी ज्यादा अच्छी फीलिंग है।”

हालांकि, माता-पिता ने बचपन में उन्हें मार्शल आर्ट्स में ट्रेनिंग नहीं करने दी, लेकिन उन्होंने मॉय थाई के प्रति अपने बेटे की लगन देखी। अब वो उनकी प्रोफेशनल यात्रा का समर्थन करते हैं

रॉबर्ट्स ने कहा:

“मेरे परिवार को लगा कि ये बड़ी ही प्राकृतिक प्रगति है। माता-पिता मेरे बारे में चिंतित रहते थे। वो अब भी चिंता करते हैं। वो मेरी फाइट देखने नहीं आते क्योंकि वो मुझे ऐसे देखकर (फाइट करते) सह नहीं पाते।

“लेकिन वो मुझे घर पर बहुत सपोर्ट करते हैं। मेरी बहनें और पूरा परिवार काफी अच्छा है। वो मेरी हर फाइट देखने आते हैं।”

‘द फाइट फिजियो’ की शुरुआत

जब रॉबर्ट्स वर्ल्ड चैंपियन एथलीट बनने पर काम कर रहे थे तो वो एक फिजियोथेरेपिस्ट के रूप में भी करियर पर ध्यान दे रहे थे।

उन्होंने फिर “द फाइट फिजियो” के नाम से अपना क्लीनिक भी शुरु किया। सालों तक चोट खाने के बाद अब वो रिंग के अंदर लोगों को फिट रखने के लिए उनकी मदद करते हैं।

34 वर्षीय स्टार ने कहा: 

“मैंने शरीर के लगभग हर हिस्से को चोट पहुंचाई है। अगर हमें कुछ अच्छे से करना है तो उसके लिए कड़ी मेहनत और ट्रेनिंग करनी पड़ती है। इस तरह चोट लगने का डर रहता है तो मैंने सोचा कि इन्हें ठीक करने के बार में भी सीखना चाहिए।”

मॉय थाई में मुकाबला करना और क्लीनिक चलाना आसान नहीं रहा, लेकिन इससे उन्हें खुशी मिली।

जब तब रॉबर्ट्स के हाथ-पैर चल रहे हैं तो वो ग्लव्स का साथ नहीं छोड़ेंगे। वो जानते हैं कि इस ज्ञान को फाइट की तैयारी में लगा सकते हैं:

“मैंने अपनी जिंदगी को अच्छे से बना लिया है। मेरा दिन सुबह छह बजे शुरु होता है। सुबह तीन घंटे काम के बाद दो घंटे की ट्रेनिंग, उसके बाद तीन-चार घंटे काम के बाद खाना और फिर शाम को तीन घंटों की ट्रेनिंग।

“मेरे पास दूसरी चीजें करने के लिए समय नहीं होता। लेकिन इसने मुझे वहां तक पहुंचाया है, जहां मैं आज हूं। और मैं इस बात से काफी खुश हूं।

“मैंने फाइटिंग छोड़कर एक बार भी फुल टाइम फिजियोथेरेपी करने के बारे में नहीं सोचा। अगर ये मेरी जिंदगी में नहीं हुआ तो काफी खालीपन आ जाएगा।”

शिखर पर पहुंचने का संघर्ष

दूसरे खिलाड़ियों की तुलना में देरी से कॉम्बैट स्पोर्ट्स में करियर शुरु करने के बावजूद अपनी मेहनत और लगन की वजह से उन्होंने अप्रत्याशित कामयाबी पाई है।

रीजनल, स्टेट, नेशनल और फिर इंटरनेशल लेवल पर काम करते हुए “द वाइकिंग” ने अक्टूबर में WBC हेवीवेट मॉय थाई वर्ल्ड टाइटल अपने नाम किया।

उन्हें इस मुकाम पर पहुंचने में 10 साल का समय लगा है। अपने करियर की सबसे बड़ी जीत हासिल करने के हफ्तों बाद उन्हें दुनिया के सबसे बड़े मार्शल आर्ट्स संगठन में डेब्यू करने के लिए ऑफर मिला।

उन्होंने इस बारे में कहा: 

“वो सपने के सच होने जैसा था (वर्ल्ड टाइटल जीत)। वो एक तगड़े चैंपियन लिंडन (नोल्स) के खिलाफ बेहतरीन फाइट थी।

“इस कारण मुझे इतना बड़ा मौका मिला। मैं जिस मुकाम पर हूं, उससे ज्यादा खुशी मिल ही नहीं सकती। कभी-कभी लगता है कि मैं किसी सपने में हूं।”

अब रॉबर्ट्स का सामना दुनिया के सबसे बेहतरीन पाउंड-फोर-पाउंड स्ट्राइकर्स में से एक से होने जा रहा है।

2019 में ONE को जॉइन करने के बाद से ही यूक्रेनियाई स्टार क्रीकलिआ को कोई रोक नहीं पाया है। इस दौरान उन्होंने लाइट हेवीवेट किकबॉक्सिंग डिविजन में खिताब जीता, लेकिन रॉबर्ट्स इस चैलेंज के लिए तैयार हैं।

उन्होंने कहा:

“मैं अपनी आखिरी फाइट के बाद से काफी फिट हूं। मैं हमेशा फिट और हमेशा तैयार रहता हूं। तो मैंने सोचा, ‘ये परफेक्ट है।’ साल खत्म होने से पहले एक और फाइट मिल रही है और ये क्रिसमस से पहले अच्छा बोनस होगा।

“मैं वहां जाकर बेल्ट जीतना और फिर इसे डिफेंड करना चाहता हूं। मुझे सिर्फ ONE में फाइट कर खुशी होगी और पूरे डिविजन का सफाया करते हुए शिखर पर रहते हुए रिटायर होना चाहूंगा।”

मॉय थाई में और

Rambolek Chor Ajalaboon (center) and Superbon (right) at The Inner Circle 7.
Seksan Or Kwanmuang battles rival Muangthai PK Saenchai at ONE Friday Fights 114
Stamp Fairtex fires a teep on Selina Flores at ONE Fight Night 47
Petmuangsri counters with a left elbow against Gregor Thom at The Inner Circle 29.
Split image of Muay Thai stars Stamp Fairtex and Selina Flores
Petmuangsri Torfunfarm faces off with Gregor Thom ahead of The Inner Circle 29
Regian Eersel to defend his Muay Thai crown against George Jarvis in a highly anticipated rematch on October 2
Stamp Fairtex Alyse Anderson ONE Fight Night 10 57
Indian MMA fighter Nazareth “The Northstar” Lalthazuala makes his way to the ring
Wuttikrai Wor Chakrawut Mohammad Habibpour ONE Friday Fights 168
Lenny Blasi Worapon Lukjaoporongtom The Inner Circle 28
Muay Thai fighters Worapon Lukjaoporongtom and Lenny Blasi face off ahead of The Inner Circle 28